नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग और बीमा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को निजी क्षेत्र के दिग्गज ऋणदाता ICICI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति दे दी है।
प्राइवेट लेंडर ICICI बैंक ने शनिवार को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने LIC को ICICI बैंक में पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग राइट्स का कुल 9.99% तक हिस्सा खरीदने की मंजूरी दे दी है। जून 2026 तक, ICICI बैंक में LIC की 4.35% हिस्सेदारी थी, जिसकी कीमत लगभग ₹45,447.33 करोड़ थी।
हिस्सेदारी हासिल करने के लिए LIC के पास एक साल का समय
ICICI बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बैंक को 4 सितंबर, 2026 की रात लगभग 9:09 बजे रिजर्व बैंक का एक पत्र प्राप्त हुआ। इस पत्र में RBI ने LIC (आवेदक) को बैंक की चुकता शेयर पूंजी (Paid-up share capital) या वोटिंग अधिकारों का 9.99% तक ‘कुल होल्डिंग’ (Aggregate Holding) हासिल करने की मंजूरी दे दी है।
RBI द्वारा दी गई यह मंजूरी स्थायी नहीं है। LIC को यह हिस्सेदारी बढ़ाने की प्रक्रिया RBI के पत्र की तारीख से एक वर्ष के भीतर पूरी करनी होगी। यदि LIC इस निर्धारित समय सीमा (4 सितंबर, 2027 तक) के भीतर हिस्सेदारी हासिल करने में विफल रहती है, तो रिजर्व बैंक की यह मंजूरी स्वतः ही रद्द मानी जाएगी।
बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ दी गई है। इसमें प्रासंगिक वैधानिक और नियामक प्रावधानों का अनुपालन शामिल है। यह प्रकटीकरण सेबी (SEBI) के ‘लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स’ (LODR) रेगुलेशन, 2015 के नियम 30 के तहत किया गया है।
IT शेयरों से LIC को हुआ तगड़ा फायदा
सरकारी बीमा कंपनी द्वारा हिस्सेदारी खरीदने का यह कदम, तीन सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनियों से सिर्फ 35 दिनों में 21,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ‘मार्क-टू-मार्केट’ फायदा कमाने के लगभग एक महीने बाद उठाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस और HCL टेक्नोलॉजीज़ में LIC की हिस्सेदारी की मार्केट वैल्यू जून के आखिर में ₹1.05 लाख करोड़ थी, जो 4 अगस्त को बढ़कर ₹1.26 लाख करोड़ हो गई। इससे कुल मिलाकर ₹21,032 करोड़ का ‘पेपर गेन’ (कागजी फायदा) हुआ।



















