पंजाब के सीधे-सादे युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी का लालच देकर एक बड़े धोखे के जाल में फंसाया जा रहा है। यूरोप या ऑस्ट्रेलिया भेजने का झांसा देकर इन युवाओं को थाईलैंड, इथियोपिया, ईरान और केन्या जैसे देशों में ले जाया जाता है और वहां उन्हें बंद कमरों में बंधक बनाकर रखा जाता है। इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे एक मास्टरमाइंड का नाम सामने आ रहा है, वो है ‘खान बाबा’।
पंजाब के अलग-अलग जिलों से आए मामलों में पीड़ितों के परिवारों को खान बाबा नाम के व्यक्ति का फोन आता है, जो युवाओं की रिहाई के बदले 15 लाख से लेकर 70 लाख रुपये तक की भारी-भरकम फिरौती मांगता है। परिवार अपने बच्चों को सही-सलामत वापस लाने के लिए जमीनें, जेवर और कीमती सामान बेचकर उधार पैसे चुकाने को मजबूर हैं।
थाईलैंड से इथियोपिया तक फैला खौफनाक नेटवर्क
विदेश में नौकरी दिलाने वाले फर्जी ट्रैवल एजेंट बेहद शातिराना तरीके से काम करते हैं। शुरुआत में ये एजेंट युवाओं से कोई पैसा नहीं मांगते और कहते हैं कि वहां पहुंचकर कमाकर पैसे चुका देना। इसी झांसे में आकर पंजाब के कपूरथला के मनप्रीत और जालंधर के कुलराज इस साल 30 जून को स्पेन के लिए निकले, लेकिन उन्हें थाईलैंड पहुंचा दिया गया।
थाईलैंड पहुंचते ही उन्हें बंधक बना लिया गया और फिर परिजनों को खान बाबा का फोन आया, जिसने दोनों की रिहाई के बदले 15 15 लाख रुपये मांगे। मनप्रीत के परिवार ने जैसे-तैसे पैसे दिए तो वह घर लौट आया, लेकिन कुलराज का परिवार पूरी रकम नहीं दे पाया। इसके बाद कुलराज को थाईलैंड की जेल में बंद करवा दिया गया। इसी तरह फतेहगढ़ साहिब के हरबंस सिंह और फाजिल्का के रोहित कुमार को दक्षिण कोरिया का सपना दिखाकर इथियोपिया पहुंचा दिया गया, जहां उन्हें हफ्तों बंधक बनाकर रखा गया।
‘भूखा रखा, अंडरवियर में छोड़ा और कनपटी पर रखी पिस्तौल’
इथियोपिया में 26 दिनों तक बंधक रहकर लौटे हरबंस सिंह की आपबीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है। उसने बताया कि बंधक बनाने वाले लोग उन्हें डंडों और लोहे की छड़ों से बेरहमी से पीटते थे। जब परिवार वालों को फोन करके पैसे मांगने होते थे, तब उनकी कनपटी पर पिस्तौल रख दी जाती थी।
फाजिल्का के रोहित कुमार ने बताया कि अदीस अबाबा एयरपोर्ट से ले जाकर उन्हें शाशेमेने शहर के एक कमरे में बंद कर दिया गया। उनके कपड़े उतरवाकर सिर्फ अंडरवियर में रखा जाता था और हाथ-पैर बांध दिए जाते थे। खाने के नाम पर सिर्फ अधपके आलू दिए जाते थे। रोहित के शरीर पर आज भी उन अत्याचारों के निशान मौजूद हैं।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए वसूले जा रहे हैं लाखों रुपये
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नेटवर्क में शामिल एजेंट भारत से बाहर बैठकर पूरे खेल को संचालित कर रहे हैं। पीड़ित परिवारों से रकम ऐंठने के लिए हवाला और क्रिप्टोकरेंसी जैसे डिजिटल रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अमृतसर, चंडीगढ़, पटियाला और नैनीताल जैसे शहरों में खान बाबा के गुर्गे मौजूद हैं, जो कैश लेते हैं और उसे डिजिटल करेंसी में बदलकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाते हैं।
थाईलैंड में पुलिस कार्रवाई से सामने आया एक और मामला
फगवाड़ा के राम बालक को भी दक्षिण कोरिया में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। उन्हें इस साल की शुरुआत में थाईलैंड ले जाया गया। 29 जुलाई को थाई पुलिस की कार्रवाई के दौरान राम बालक और कथित अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। राम बालक के भाई राजकुमार का कहना है कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और इसी वजह से वह इस पूरे मामले में फंस गया। उन्होंने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर राम बालक की सुरक्षित वापसी की मांग की है।
पुलिस जांच में जुटी, संसद तक गूंजी आवाज
पंजाब पुलिस परिवारों द्वारा दी गई कॉल रिकॉर्डिंग्स और ऑडियो क्लिप्स के आधार पर खान बाबा को ढूंढ़ने की कोशिश में लगी है। कपूरथला पुलिस के अनुसार मामले की गहराई से जांच की जा रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सींचेवाल ने इस गंभीर मुद्दे पर विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखकर इंटरपोल की मदद लेने की मांग की है।



















