कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक वकील को कोर्ट में नशे में आने और कामकाज में बाधा डालने के आरोप में एक दिन की साधारण कैद की सजा सुनाई है। सजा सिर्फ कोर्ट उठने तक के लिए है। साथ ही उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जस्टिस अनु सिवारामन और जस्टिस वेंकटेश नायक टी की बेंच ने 11 सितंबर को यह फैसला सुनाया। अदालत ने साफ कहा कि वकील पंकज कौशिक में कोई पछतावा नहीं दिखता। वह अपनी गलती को सही ठहराने की कोशिश करता रहा और न्यायाधीशों के खिलाफ बेबुनियाद बातें करता रहा।
‘सजा नहीं दी गई तो लोग बार-बार यही गलती दोहराएंगे’
अदालत ने यहां तक कहा कि अगर ऐसे व्यवहार को सजा नहीं दी गई तो ऐसे लोग बार-बार यही गलती दोहराएंगे। इससे कानून का राज और पूरा न्यायिक सिस्टम खतरे में पड़ सकता है।
क्या है मामला?
यह मामला 2022 का है। करवार के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर बताया था कि वकील पंकज कौशिक ने दो बार कोर्ट में हंगामा किया।
वह अपनी पत्नी द्वारा दायर घरेलू हिंसा के मामले में खुद पक्षकार के रूप में पेश हो रहा था। अप्रैल 2022 में पहली बार उसने जज पर चिल्लाया कि उसका केस क्यों नहीं सुना जा रहा। केस उस दिन लिस्ट में भी नहीं था।
क्लर्क को भी डांटा
वकील ने क्लर्क को भी डांटा और जज पर आरोप लगाया कि वे उसकी पत्नी से रिश्वत लेकर उसके पक्ष में आदेश दे रहे हैं। हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ भी उसने बदनाम करने वाली बातें कही। तीन दिन बाद उसने माफी मांगी लेकिन 22 अप्रैल को फिर वही रवैया दोहराया।
एक वरिष्ठ वकील की दलील के दौरान बीच में घुसकर बोला कि चुप हो जाओ, मेरा केस लो। जज के रोकने के बावजूद चिल्लाता रहा। बाद में उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने नशे में होने का सर्टिफिकेट जारी किया।
हाईकोर्ट ने खुद लिया संज्ञान
इन दोनों घटनाओं की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लिया और अवमानना का मामला चलाया। वकील ने अदालत में कहा कि वह नशे में नहीं था। सर्टिफिकेट बाद की तारीख का है। उसने दावा किया कि उसे परेशान करने के लिए यह मामला चलाया गया।
साथ ही बताया कि उसे मिर्गी की बीमारी है और कभी-कभी दौरे पड़ते हैं। लेकिन अदालत ने सबूतों के आधार पर आरोप सही पाए। अदालत ने कहा कि उसका रवैया और बात करने का तरीका साफ तौर पर अदालत की अवमानना करता है।
अदालत में खुद अपनी तरफ से लड़ रहा था वकील
अदालत ने साफ कहा- यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है। यह सामाजिक, नैतिक और न्यायिक नियमों के प्रति पूरी उदासीनता दिखाता है। हाईकोर्ट की ओर से सरकारी वकील तेजेश पी पेश हुए जबकि आरोपी वकील खुद अपनी तरफ से खड़ा हुआ।



















