‘ब्रिक्स’ की बल्ले-बल्ले… भारत की हल्ले-हल्ले..! मोदी-पुतिन की झप्पियां, मोदी-जिनपिंग का हाथ मिलाना और मोदी-पेजेश्कियान की मुस्कियां… ये छवियां दिनों तक याद रहेंगी..! एक लंबा चौड़ा घोषणा-पत्र… कि आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं… कोई समझौता नहीं… कि युद्ध नहीं, शांति की जरूरत, किसी देश की दादागीरी स्वीकार नहीं..! तीन दिन तक लगातार ब्रिक्स सम्मेलन की चमक।

मीडिया हुआ बावला… कस के मारे अमेरिका और पाक पर कटाक्ष कि ये बना दुनिया के तीन अरब लोगों का संयुक्त मोर्चा… अमेरिकी दादागीरी को आईना… डालर के विकल्प की मांग, जिसके तहत ‘ब्रिक्स’ के सदस्य देश आपस में अपनी-अपनी मुद्रा में कारोबार कर सकते हैं और डालर की दादागीरी से मुक्त हो सकते हैं!

उधर, जब ब्रिक्स में कुछ निंदनीय न मिला, तो निशाना बने ‘छोले-भटूरे…’ कि विदेशी मेहमानों को शाकाहारी ही क्यों परोसा! भोजन की राजनीति पर चर्चा दो दिन जारी रही, लेकिन तीसरे दिन के बाद निपट गई।

फिर एक दिन खबर आई कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने ‘धुरंधर’ के भी रिकॉर्ड को तोड़ा… दो करोड़ का खर्चा और कुछ ही दिनों में दो सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई..! ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक बताते रहे कि किस तरह से ‘नीम करौली बाबा’ सभी को ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करने को कहा करते थे… और पाठ करके उसका अर्थ करते दिखे। कई पंडित बताते रहे कि ‘हनुमान अंश’ ने बड़े बजट की फिल्मों की ऐसी की तैसी कर दी और सबने कहा कि जो फिल्म जनता के दिल की कहानी कहती है, वही हिट होती है।

इसके बरक्स खबर आई ‘उमर खालिद’ पर बने वृत्तचित्र को दिखाने और न दिखाने के विवाद की..! देखा! अपना समाज कितना ‘बहुलतावादी’ है कि सबके अपने-अपने हीरो हो सकते हैं।

फिर एक दिन एलान हुआ कि भाजपा शासित इक्कीस राज्यों में आगामी दिनों में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू होगा। इसके बाद तो चैनलों की बहसें भिड़ंतों में बदलनी ही थी और बदलीं भी। सत्ता कहिन कि विकास के लिए यूसीसी जरूरी, लेकिन विपक्ष के कुछ नेता कहिन कि पहले संसद में पास कराते, फिर लागू करते। ये पिछले दरवाजे से क्यों करते हैं? सत्ता प्रवक्ता कहिन कि ‘एक देश एक कानून जरूरी’। आगे संसद में भी आ जाएगा, लेकिन आप तो तब भी विरोध करेंगे।

फिर आई यूपीआई सेवा पर ‘शुल्क’ लगाने की बात और विरोध में सारा विपक्ष एक साथ लामबंद कि यह तो आम लोगों को लूटना है। पहले मुफ्त रखकर लोगों को यूपीआई का चस्का लगाया और जब लोगों को आदत हो गई तो ‘शुल्क’ लगा दिया। यह लोगों की ‘खुली लूट’ नहीं तो और क्या है..! सत्ता कहिन कि व्यक्ति से व्यक्ति के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं, लेकिन दुकान से खरीद-फरोख्त पर 0.4 फीसद शुल्क लगेगा, जिसे दुकानदार देगा। विपक्ष कहिन कि दुकानदार इसका बोझ ग्राहक पर ही तो डालेगा..!

कई चर्चक यह भी कहिन कि यह सरकार भी पंगा लेने से बाज नहीं आती। एक तो पहले ही इतनी महंगाई और बेरोजगारी, ऊपर से ये शुल्क, लेकिन सरकार कहे कि यूपीआई के लिए सरकार अब भी 20,000 करोड़ से अधिक की ‘सब्सिडी’ देती है। शुल्क से सरकार का बोझ कुछ ही कम होगा।

फिर एक दिन ‘अंकल सैम जी’ जागे और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसद शुल्क का नियम पारित करा लिए, ताकि रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को ज्यादा न चला सके। कई विशेषज्ञ कहते रहे कि यह सब भारत और चीन के खिलाफ ‘शुल्क आतंक’ है। बहरहाल, अगर रूस ने यूरोप को तेल आपूर्ति बंद कर दी, तो यूरोप तो ठंड से मर जाएगा। तब ‘अंकल सैम’ क्या करेंगे? कुछ कहिन कि भारत को इस गीदड़ भभकी के आगे नहीं झुकना है। एक देशभक्त कहिन कि जब भारत ‘व्यापार समझौते’ पर अब तक नहीं झुका, तो अब क्या झुकेगा?

इसके बाद एक खबर बनाई प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिवस ने। इस अवसर पर एक ओर ‘जेन-जी पीढ़ी’ द्वारा बाइक रैली निकाली गई। साथ ही बताया गया कि इस अवसर पर 100 शहरों में ‘आशीर्वाद के दीये’ जलाए जाएंगे। इसके बाद कहीं तीस लाख दीये जलाए गए तो कहीं बीस लाख। कहीं दस लाख… तो कहीं दो लाख दीये भी जलाए गए!

इस अवसर पर एक चैनल चर्चा में एंकर से लेकर बहुत से चर्चक ‘ब्रांड मोदी’ को ‘डिकोड’ करने में लगे रहे। एक कहिन कि जो ब्रांड वक्त के हिसाब से अपने को ढालने की क्षमता रखते हैं, वही जिंदा रहते हैं। ‘ब्रांड मोदी’ ऐसा ही है। उदाहरण के लिए 20 जुलाई के बाद जब ‘जेन-जी’ के धरने का दबाव बना, तो तुरंत मोदी अपनी रील बनाकर स्वयं इंस्टाग्राम पर आकर जेन-जी पीढ़ी को संबोधित करते दिखे। ब्रांड मोदी ऐसा ही लचीला है। एक ने कहा कि उनमें अपनी रूढ़ छवि को छोड़ने की जिद है, इसीलिए वे दूसरों से अलग हैं।

यह भी पढ़ें: ‘भारत ने काफी पहल की है… अब बांग्लादेश पर निर्भर’: पूर्व भारतीय उच्चायुक्त पिनाक रंजन चक्रवर्ती

बांग्लादेश भारत को नजरअंदाज करके नहीं चल सकता और न ही भारत की जगह कोई दूसरा देश ले सकता है। दोनों देशों के बीच साझा सभ्यतागत विरासत है। लाखों बांग्लादेशी इलाज के लिए भारत आते हैं। दोनों देशों के बीच बहुत बड़ा व्यापार और संपर्क है। यह ऐसा रिश्ता है जिसे नजरअंदाज करना बांग्लादेश के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक

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