जयपुर। राजस्थान में ग्राम पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। चुनावी माहौल के बीच अब ग्रामीण इलाकों से स्थानीय समस्याओं को लेकर विरोध के स्वर भी सामने आने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विधानसभा क्षेत्र झालरापाटन की सुनेल तहसील का समिया गांव इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है। यहां स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होने का आरोप लगाते हुए आगामी ग्राम पंचायत चुनाव में मतदान के बहिष्कार का ऐलान किया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कनवाड़ा लघु सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए समिया गांव में एक कॉलोनी विकसित की गई थी। लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2016 से अब तक इस कॉलोनी में सड़क और नालियों का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके कारण बारिश के दौरान पानी लोगों के घरों तक पहुंच जाता है और स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क, नाली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग उठाई जा रही है। इस संबंध में जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी और जनसुनवाई शिविरों में भी कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन उनका कहना है कि अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
स्थानीय निवासी सुरेश, प्रेमचंद, साबिर सहित अन्य ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि और प्रत्याशी वोट मांगने गांव तक पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद ग्रामीणों की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों और मांगों के बावजूद यदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं तो मतदान के बहिष्कार के अलावा उनके पास विरोध का दूसरा रास्ता नहीं बचता।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सड़क, नाली और पानी से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक वे मतदान से दूरी बनाए रखने के अपने निर्णय पर कायम रहेंगे। मतदान बहिष्कार के इस ऐलान के बाद स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।
अब ग्राम पंचायत चुनाव से पहले प्रशासन के सामने ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने की चुनौती है। वहीं चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए भी यह मुद्दा अहम माना जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि उनकी समस्याओं का मौके पर निरीक्षण कर स्थायी समाधान कराया जाए।
फिलहाल समिया गांव में ग्रामीणों का मतदान बहिष्कार का ऐलान स्थानीय समस्याओं और चुनावी प्रक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या ग्रामीणों की मांगों का समाधान होने के बाद वे अपने मतदान बहिष्कार के फैसले पर पुनर्विचार करते हैं।



















