यूरोपीय संघ (EU) की ओर से चीनी कंपनियों और उत्पादों पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर चीन ने कड़ा रुख अपनाया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगर यूरोपीय संघ ने चीनी कंपनियों या उत्पादों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठाए तो चीन अपने उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए दृढ़ और निर्णायक जवाब देगा। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इसको लेकर बयान भी जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि यूरोपीय संघ के कुछ सदस्य देशों की ओर से कथित तौर पर एक संयुक्त दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। इसमें अनुचित व्यापार से निपटने के लिए एक ऐसे तंत्र की मांग की गई है, जिसके जरिए चीन के खिलाफ अधिक कड़े कदम उठाए जा सकें।
चीन ने बताया ‘संरक्षणवादी’ कदम
चीन ने प्रस्तावित व्यापारिक तंत्र को ‘विशिष्ट संरक्षणवादी और एकतरफा उपाय’ बताया है। मंत्रालय के अनुसार, इस तरह के कदम चीन और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि अगर यूरोपीय पक्ष चीन के साथ बातचीत और परामर्श की प्रक्रिया जारी रखने के साथ-साथ चीन पर दबाव बढ़ाता रहा, तो इससे दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है और बातचीत की समग्र प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
चीन के पास कई विकल्प
सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने बुधवार को एक चीनी पर्यवेक्षक के हवाले से बताया कि चीन के पास जवाब देने के लिए ‘मजबूत नीतिगत विकल्पों का पूरा पैकेज’ हो सकता है।
इन विकल्पों में चीन में भेदभावपूर्ण व्यापारिक गतिविधियों की जांच, औद्योगिक और सप्लाई चेन की सुरक्षा से जुड़ी जांच तथा विदेशी सब्सिडी के प्रभाव की समीक्षा जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
अमेरिका की Section 301 जैसी व्यवस्था की चर्चा
यह चेतावनी यूरोप-चीन संबंधों पर नजर रखने वाले रोधियम ग्रुप के वरिष्ठ सलाहकार नोआ बार्किन के एक लेख के बाद सामने आई है। बार्किन के अनुसार, जर्मनी और फ्रांस इस सप्ताह एक संयुक्त दस्तावेज को अंतिम रूप दे रहे थे। इसमें यूरोपीय आयोग से ऐसे तंत्र के विकास में तेजी लाने की मांग की जा सकती है, जो चीन के खिलाफ कार्रवाई के मामले में अमेरिका की Section 301 व्यवस्था जैसा हो।
Section 301 के तहत अमेरिका अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ जांच और जवाबी व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है।
चीन-EU व्यापार संबंधों पर बढ़ सकता है दबाव
चीन और यूरोपीय संघ पहले से ही व्यापार, औद्योगिक सब्सिडी और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर मतभेदों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यूरोपीय संघ की ओर से चीनी कंपनियों और उत्पादों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है।



















