बाड़मेर: देश को नए एयर चीफ मार्शल के तौर पर आशुतोष दीक्षित मिल गए हैं। लेकिन जितना यह देश के लिए गौरव का पल है, उतना ही राजस्थान और बाड़मेर के लिए भी है। दरअसल, दीक्षित एक समय बाड़मेर स्थित उत्तरलाई एयरफोर्स स्टेशन के पूर्व स्टेशन कमांडर भी रहे चुुके हैं। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, वे 31 अक्टूबर 2026 को पदभार संभालेंगे। साथ ही उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा। सीमावर्ती जिले में सेवाएं दे चुके अधिकारी के हाथों में अब देश की वायु सुरक्षा की सर्वोच्च कमान होगी, जिससे पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है।
उत्तरलाई में 2 साल का यादगार कार्यकाल
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित वर्ष 2012 से 2014 तक बाड़मेर के उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन के स्टेशन कमांडर रह चुके हैं। तत्कालीन एयर चीफ मार्शल एन.के. ब्राउन के दौर के बाद बाड़मेर में तैनात हुए दीक्षित का कार्यकाल संयुक्त युद्धाभ्यासों और युद्धकौशल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। राजस्थान की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा और सामरिक तैयारियों को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही थी।

शानदार सैन्य सफर और 3500 घंटे की उड़ान का अनुभव
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वे स्टाफ कोर्स (बांग्लादेश) और नेशनल डिफेंस कॉलेज (नई दिल्ली) के स्नातक हैं। एक कुशल फाइटर पायलट के रूप में उनके पास मिराज-2000 और मिग-21 जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों सहित 3,500 घंटे से अधिक की उड़ान का विशाल अनुभव है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उपप्रमुख से सर्वोच्च पद तक का सफर
अपने लंबे सैन्य जीवन में उन्होंने देशभक्ति, तकनीकी दक्षता और बेहतरीन नेतृत्व का परिचय दिया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उनके रणनीतिक योगदान को कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल माना जाता है। उत्तरलाई से स्थानांतरण के बाद वे लगातार उच्च पदों पर पदोन्नत होते रहे। हाल ही में वे वायुसेना उपप्रमुख (वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब 6 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के बाद वे देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व का हिस्सा बनकर भारतीय आसमान की पहरेदारी करेंगे।



















