पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने हुमायूं कबीर की कड़ी आलोचना की है। वेस्ट मेदनीपुर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल की राजनीति बदल चुकी है, इसलिए धौंस और दादागीरी का दौर अब खत्म होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों के दिल्ली दौरों पर तंज कसा और अनुभवी अभिनेता और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती को कैबिनेट रैंक के साथ राज्य सरकार का सलाहकार नियुक्त करने के फैसले का स्वागत किया।
हुमायूं कबीर पर दिलीप घोष ने साधा निशाना
हुमायूं कबीर के हालिया बयानों और उनसे जुड़े विवादों पर निशाना साधते हुए दिलीप घोष ने कहा कि कबीर को अपना राजनीतिक नजरिया बदलने की जरूरत है। पूरा बंगाल अब बदल चुका है, फिर भी वह खुद को बदलने को तैयार नहीं हैं। बंगाल में दादागिरी और जबरदस्ती की राजनीति अब नहीं चलेगी। राज्य की जनता इस पूरे मामले को पुलिस द्वारा संभाले जाने के तरीके से बेहद खुश है।
दिलीप घोष ने कहा कि कानून की नजर में सब बराबर हैं, चाहे नेता हो या अभिनेता, कोई भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने आगे कहा कि लंबे समय से चुनावों में अनुचित तरीके से प्रभाव डालने की जो कोशिशें हो रही हैं, उन्हें बंद किया जाना चाहिए।
दरअसल, पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव के दौरान हुमायूं कबीर पर पोलिंग स्टेशन के पास अशांति फैलाने, नियमों का उल्लंघन करने और वोटरों व चुनावी प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रभावित करने के आरोप लगे थे। जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वोटिंग के दिन ही उन्हें हिरासत में ले लिया था। इसी पुलिस कार्रवाई की सराहना करते हुए मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी है।
दिलीप घोष का विपक्ष पर तंज- दिल्ली जाने से क्या होगा?
विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए दिलीप घोष ने कहा कि वे दिल्ली जा सकते हैं, वापस आ सकते हैं या जितनी चाहें उतनी याचिकाएं दायर कर सकते हैं, किसी को इससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इससे क्या हासिल होगा? बंगाल में जमीनी स्तर पर असल में क्या बदलेगा? सच तो यह है कि बंगाल में विपक्ष गायब है। जिन्हें जनता ने विपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, वे अपनी भूमिका निभाने के बजाय दिल्ली भाग रहे हैं। इन सब बातों का क्या मतलब है?
मिथुन चक्रवर्ती की नियुक्ति पर जताई खुशी
दिलीप घोष ने दिग्गज अभिनेता और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती को कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ सूचना और संस्कृति विभाग का सलाहकार नियुक्त किए जाने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “यह बहुत अच्छी खबर है। कला और संस्कृति की दुनिया में मिथुन दा के योगदान को किसी परिचय की जरूरत नहीं है और उनका बहुत सम्मान किया जाता है। इसके अलावा, बंगाल में बदलाव लाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। राज्य को उनके अनुभव का फायदा मिलेगा और इससे बंगाल के कला और संस्कृति क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह पैदा होगा। यह वाकई एक शानदार और स्वागत योग्य फैसला है।”



















