पटना: बिहार में ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019’ के तहत पहला ऐतिहासिक फैसला आया है। पटना की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत ने अपनी पत्नी को तत्काल तीन तलाक देने के मामले में बिहटा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के सिमरी गांव निवासी नौशाद अहमद को दोषी ठहराते हुए दो साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर जुर्माना भी लगाया है। हालांकि, अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपी को पत्नी पर तेजाब से हमला करने के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया।
जेल के साथ कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया
अदालत ने आरोपी नौशाद अहमद को दो साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है और शिकायतकर्ता को 6500 रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया।
- कैद की अवधि: दो साल का कठोर कारावास।
- आर्थिक दंड: शिकायतकर्ता को 6500 रुपये का जुर्माना भुगतान करना होगा।
- अतिरिक्त सजा: जुर्माना न भरने की स्थिति में आरोपी को 1 महीने और 22 दिनों की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
क्या है पूरा मामला ?
शिकायतकर्ता रजिया सुल्तान उर्फ गुड़िया का विवाह 9 नवंबर 2001 को नौशाद अहमद के साथ हुआ था और उनके तीन बच्चे हैं। फुलवारी शरीफ थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 2022 में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की थी। इसके बाद 5 सितंबर 2022 को उसने अपनी पत्नी को तीन तलाक दे दिया। पुलिस ने मामले की गहन जांच के बाद 31 जुलाई 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी।



















