Iskos Vegetable Health Benefits: उत्तराखंड की वादियों में बहुतायत से पाई जाने वाली ‘इस्कोश’ को स्थानीय भाषा में इस्कुस या छयोते भी कहा जाता है. वहीं, अंग्रेजी में इसे चायोटे (Chayote) और भारत के कुछ हिस्सों में चौ-चौ (Chow Chow) के नाम से जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Sechium edule है. यह पहाड़ी खान-पान की एक स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी है. हरे रंग और हल्के छिलके वाली इस सब्जी में फाइबर, विटामिन सी, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी के मुताबिक, ये पोषक तत्व पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने, वजन नियंत्रित करने और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं. पहाड़ों में घरों के आंगन और छतों पर बेल के रूप में उगने वाली इस सब्जी को इसके हल्के-मीठे और रसीले स्वाद के लिए पसंद किया जाता है. इसका इस्तेमाल सूखी सब्जी, तरीदार रस्सा, भरवां व्यंजन और सूप बनाने में भी किया जाता है.

कम कैलोरी और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इस्कोश पहाड़ी संस्कृति और पारंपरिक भोजन का अहम हिस्सा है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है. वहीं, इसमें मौजूद पोटेशियम शरीर में ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है. इसे मधुमेह, बीपी, त्वचा और गर्भावस्था से जुड़ी जरूरतों के लिहाज से भी पौष्टिक आहार माना जाता है. हालांकि, किसी बीमारी के इलाज के लिए केवल इस सब्जी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.

डॉ. सिराज सिद्दीकी के मुताबिक, इस्कोश कम कैलोरी वाली सब्जी है. मधुमेह से जूझ रहे लोग भी इसे संतुलित खान-पान का हिस्सा बना सकते हैं. इसमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है. इसके अलावा, इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. इससे त्वचा की सेहत बनाए रखने में सहायता मिल सकती है. गर्भवती महिलाओं के लिए भी पौष्टिक आहार जरूरी होता है. इस्कोश में मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर को जरूरी पोषण देने में योगदान कर सकते हैं. हालांकि, गर्भावस्था के दौरान इसे खाने के फायदे व्यक्ति की जरूरतों और संपूर्ण आहार पर निर्भर करते हैं.

कई तरह से बनाई जाती है इस पहाड़ी सब्जी की डिश

इस्कोश का स्वाद हल्का-मीठा और रसीला होता है, इसलिए इसे कई तरह से पकाया जा सकता है. पहाड़ी घरों में इसे आमतौर पर सूखी सब्जी, मसालेदार तरीदार रस्से या आलू के साथ मिलाकर बनाया जाता है. इसके अलावा, इससे भरवां व्यंजन और पौष्टिक सूप भी तैयार किए जा सकते हैं. कम तेल और कम मसालों में पकाने पर यह हल्का भोजन बन सकती है, जिसे बुजुर्ग और हल्का खाना पसंद करने वाले लोग भी अपनी पसंद के अनुसार खा सकते हैं.

सब्जी ही नहीं, सलाद के रूप में भी खाते हैं इस्कोश

इस्कोश अपनी कम कैलोरी और पानी की अच्छी मात्रा के कारण पहाड़ी खान-पान और पारंपरिक जीवनशैली का अहम हिस्सा बनी हुई है. यह पहाड़ों की खान-पान परंपरा को दर्शाने के साथ स्थानीय खेती का भी उदाहरण है. कुछ लोग इसे सब्जी बनाकर खाते हैं, जबकि कुछ लोग सलाद के रूप में भी इसका सेवन करते हैं. घर के आंगन में उगाई जाने वाली यह सब्जी अब शहरों में रहने वाले लोगों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बन रही है. अगर आप पहाड़ों के पारंपरिक स्वाद को चखना चाहते हैं, तो इस्कोश को अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं.

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