अहमदाबाद : यूनेस्को (UNESCO) में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत की तीन जगहों को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) के ‘विश्व धरोहर सम्मेलन’ (World Heritage Convention) की संभावित सूची में शामिल किया गया है। इन तीन जगहों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित ‘बाराटांग का कार्स्ट-मड-ज्वालामुखी कॉम्प्लेक्स’ (Karst-mud-volcano Complex), अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी ( Andaman Subduction Volcanoes ) और छत्तीसगढ़ में स्थित ‘सिरपुर सांस्कृतिक और पुरातात्विक परिदृश्य’ ( Sirpur Cultural and Archaeological Landscape) शामिल हैं।
पेरिस स्थित यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल ने 20 अक्टूबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन के तहत भारत की संभावित सूची में इन जगहों को जोड़ा गया है।
एएसआई की तारीफ
किसी भी जगह को ‘विश्व धरोहर सूची’ (World Heritage List) में नामांकन के लिए विचार किए जाने से पहले, उसका ‘संभावित सूची’ में शामिल होना एक जरूरी शर्त है। प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रक्रिया में किए गए काम के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भी सराहना की। इन जगहों को शामिल करना, भविष्य में इन तीनों स्थलों को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दिशा में एक कदम है।
भारत में यूनेस्को विश्व धरोहर हुईं 45
जुलाई 2026 में सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल को शामिल किए जाने के बाद, अब भारत में कुल 45 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें 37 सांस्कृतिक स्थल, सात प्राकृतिक स्थल और एक मिश्रित स्थल शामिल हैं।
दुनिया में सबसे ज्यादा विश्व धरोहर के मामले में भारत का 6वां स्थान
भारत इस मामले में दुनिया भर में छठे स्थान पर है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है। सबसे अधिक विश्व धरोहर स्थलों वाले पांच देश हैं। इटली (62 स्थल), चीन (61), फ्रांस (56), जर्मनी (55) और स्पेन (50)।
भारत के पहले चार स्थलों को 1983 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। महाराष्ट्र में अजंता की गुफाएं और एलोरा की गुफाएं, तथा उत्तर प्रदेश में आगरा का किला और ताजमहल। ये सभी सांस्कृतिक स्थल थे, जिन्हें उनके ऐतिहासिक, स्थापत्य और कलात्मक महत्व के लिए मान्यता दी गई थी।



















