आज के टैलीविजन और ओ.टी.टी. युग में रियलिटी शो युवाओं के लिए सपनों का बाजार बन चुके हैं। ‘आप भी सेलिब्रिटी बन सकते हैं’, ‘आपकी असली कहानी दुनिया देखेगी’, ‘एक मौका और जिंदगी बदल जाएगी’। ऐसे नारे हर ऑडिशन में गूंजते हैं। हजारों युवा शहर-गांव छोड़कर, पढ़ाई छोड़कर, या नौकरी छोड़कर इन शोज में हिस्सा लेते हैं। वे मानते हैं कि जजों की सख्त नजर और कैमरों के सामने उनकी हिम्मत, प्रतिभा या दुखभरी कहानी उन्हें रातों-रात लोकप्रिय बना देगी। लेकिन हकीकत अक्सर इसके उलट होती है। ज्यादातर रियलिटी शो पूरी तरह स्क्रिप्टेड या ‘गाइडेड रियलिटी’ होते हैं। एडिटिंग, प्रोवोकेशन और पहले से तय ड्रामा के जरिए वे दर्शकों को बांधे रखते हैं, जबकि भोले-भाले प्रतियोगी अक्सर सिर्फ ‘कंटैंट’ बनकर रह जाते हैं।
भारतीय रियलिटी टैलीविजन की सबसे पुरानी और विवादास्पद शृंखला ‘एमटीवी रोडीज’ इसका जीवंत उदाहरण है। शो के पुराने जज रघु राम ने खुद स्वीकार किया है कि प्रोड्यूसर्स उन्हें कंटैस्टैंट्स पर चिल्लाने और ड्रामा बढ़ाने के लिए कहते थे। उन्होंने कहा था कि सफलता के बाद शो उनका नहीं रहा, बल्कि निर्माताओं द्वारा उन्हें ‘उनकी धुन पर नाचने’ को कहा गया। जब रघु और राजीव लक्ष्मण ने शो छोड़ दिया, तो इसका कारण क्रिएटिव इंटरफैरेंस और जबरन ड्रामा था।
यह समस्या सिर्फ भारत की नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘द बैचलर’ के क्रिएटर माइक फ्लीस और कई पूर्व कंटैस्टैंट्स ने स्वीकार किया है कि रिश्ते, डेट्स और भावनात्मक टूटने के किस्से या सीन अक्सर निर्देशित होते हैं। उसी तरह ‘द हिल्स’ में तो कास्ट मैंबर्स ने बताया कि पूरा प्लॉट और डायलॉग स्क्रिप्टेड थे। ‘हाऊस हंटर्स’ में भी ज्यादातर जोड़े पहले ही घर खरीद चुके होते हैं, बाकी दो घर सिर्फ शो के लिए दिखाए जाते हैं और बैकस्टोरी भी बदली जाती है। ‘कीपिंग अप विद द कार्दाशियंस’ में शादी के प्रपोजल तक स्टेज किए गए थे। यानी ‘रियलिटी’ शब्द अक्सर सिर्फ मार्केटिंग का हथियार होता है।
ताजा मामला ‘एमटीवी रोडीज रीबर्थ’ (सीजन 21) का एक घटनाक्रम इस समस्या को और उजागर करता है। ऑडिशन में गुरुग्राम के एक युवा कंटैस्टैंट ऋतिक वालिया ने ‘औरत’ शब्द पर कुछ टिप्पणी की (कुछ व्याख्याओं के अनुसार वह अरबी शब्द ‘औराह’ के अर्थ से जुड़ा था) और जज बानी जे ने उसकी बात पूरी सुनने से पहले ही उसे टोका और सख्त प्रतिक्रिया दी और लाइव शो पर उसका फॉर्म उठा फैंक दिया। ऋतिक को अपनी बात समझाने का मौका नहीं मिला। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफाम्र्स पर कंटैस्टैंट ऋतिक वालिया के पक्ष में आवाजें उठ रही हैं। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ जज का व्यक्तिगत गुस्सा था, या शो को टी.आर.पी. और सोशल मीडिया बज चाहिए था? रोडीज का इतिहास ऐसे क्षणों से भरा हुआ है। चिल्लाना, गाली देना, और ‘सख्त’ इमेज बनाना हमेशा रेटिंग बढ़ाता रहा है। जब जज या होस्ट बिना पूरी बात सुने ही प्रतिक्रिया देते हैं, तो वह पल एडिटिंग में और ज्यादा नाटकीय बन जाता है।
सवाल उठता है कि दर्शक इन शोज में क्यों बह जाते हैं? पहला कारण है पहचान और आकांक्षा। युवा खुद को कंटैस्टैंट में देखते हैं। जब कोई जज उसे डांटता है या उसकी कहानी सुनकर भावुक होता है, तो दर्शक को लगता है कि ‘यह असली संघर्ष है’। दूसरा कारण है एडिटिंग की ताकत। घंटों की फुटेज काटकर, बैकग्राऊंड म्यूजिक और क्लोज-अप से एक साधारण बातचीत को बड़े ड्रामा में बदल दिया जाता है। तीसरा कारण सोशल मीडिया है। वायरल क्लिप, मीम्स और पक्ष-विपक्ष की बहस शो को और बड़ा बना देती हैं। चौथा कारण है ‘सफलता की कहानियां’, कुछ लोग ऐसे रियलिटी शोज के जरिए लोकप्रिय हो जाते हैं, इसलिए बाकी सोचते हैं कि वे भी हो जाएंगे। इस बीच यह भुला दिया जाता है कि ज्यादातर कंटैस्टैंट शो के बाद अपनी पुरानी जिंदगी में लौट जाते हैं और कई तो मानसिक दबाव का शिकार भी हो चुके हैं। ऐसे में यदि कोई प्रतियोगी गलत कदम उठा ले तो यह किसकी जिमेदारी होगी?
रियलिटी शो मनोरंजन का माध्यम हो सकते हैं। उनमें एडवैंचर, ह्यूमर और प्रतिस्पर्धा हो सकती है लेकिन जब वे युवाओं को ‘लोकप्रियता का सपना’ बेचते हैं और उन्हें सिर्फ कंटैंट की मशीन समझते हैं, तो यह धोखा बन जाता है। ऐसे में देश के युवाओं के लिए सलाह स्पष्ट है कि अगर आप किसी रियलिटी शो में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो उसे सिर्फ अनुभव या मजे के तौर पर लें, न कि जीवन बदलने वाले मौके के रूप में। अपनी पढ़ाई, स्किल और असली मेहनत पर ध्यान दें। फेम अल्पकालिक हो सकता है लेकिन असली योग्यता लंबे समय तक काम आती है। रियलिटी शो तभी बेहतर होंगे जब दर्शक उन्हें मनोरंजन
समझकर देखें, न कि सच मानकर। जब तक हम ‘असली’ शब्द पर अंधविश्वास करते रहेंगे, तब तक प्रोड्यूसर्स और जज ड्रामा और बज के लिए युवाओं को इस्तेमाल करते रहेंगे। सोशल मीडिया पर कंटैस्टैंट के पक्ष में उठ रही आवाजें अच्छी हैं लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब हम पूरे सिस्टम पर सवाल उठाएंगे।-रजनीश कपूर



















