चूरू / झुंझुनूं: घर में खुशियों का माहौल था। परिवार के लोग दो मासूम बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए कुलदेवी के दर्शन करने गुरुग्राम जा रहे थे लेकिन रास्ते में हुए हादसे में दादा-दादी और दोनों बहुओं एवं एक पोते सहित लगभग पूरा परिवार उजड़ गया। लेकिन बड़ी बात यह रही कि चमत्कारिक ढंग से इनके साथ कार में सवार और अपनी मां की गोद में बैठी 9 माह की बच्ची दिव्यांशी चमत्कारिक ढंग से बच गई। 6 जनों की मौत के मंजर के बीच जब गूंजी दुधमुंही बच्ची की किलकारी मौके पर मौजूद लोगों को सुनाई दी तो इसे ‘जाको राखे साइयां’ में भगवान का चमत्कार मान रहे थे।
सीट के नीचे से आई रोने की आवाज, दौड़े ग्रामीण
इस भयावह हादसे के बाद मौके पर एकत्र एक प्रत्यक्षदर्शी रामकरण पुनिया के अनुसार, वह बाइक से ददरेवा से राजगढ़ की ओर जा रहे थे। पेट्रोल पंप के पास तेज रफ्तार अर्टिगा कार सामने चल रहे ट्रक में जा घुसी। टक्कर देखकर उन्होंने बाइक रोकी और कार की तरफ पहुंचे। ददरेवा के मोहर सिंह और रतन सिंह सहित अन्य लोग भी मदद के लिए दौड़े। कार के भीतर का दृश्य बेहद दर्दनाक था। इसी बीच आगे की सीट के पैरों की ओर से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। लोगों ने तुरंत उसे संभाला और बाहर निकाला। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, टक्कर के दौरान बच्ची नीचे की तरफ जा गिरी थी। इसी वजह से वह बाकी यात्रियों से अलग स्थिति में मिली। बच्ची कैसे बची, इसका वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन हादसे के बीच उसकी रोने की आवाज सुनाई देना मौके पर मौजूद लोगों के लिए उम्मीद का क्षण बन गया।
सफर शुरू होने से पहले लगाया वीडियो बनी यादें
इससे पहले सफर शुरू हुआ तो छोटी बहू कविता ने कार में बैठे परिजनों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में बतौर स्टेटस लगा दिया। वीडियो में परिवार साथ नजर आ रहा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद यही वीडियो परिवार की खुशियों की आखिरी याद बनकर रह जाएगा।
दोनों बेटे काम के सिलसिले में गुजरात में
इस हादसे के शिकार हुए भंवरलाल के दो बेटे और (दोनों बहुओं यशोदा और कविता के पति) यानी परिवार के दोनों बेटे संजय और संदीप गुजरात में नौकरी करते हैं। वे काम के कारण मुंडन कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे। हादसे की सूचना मिलने पर भंवरलाल के छोटे भाई मांगीलाल ने उन्हें फोन किया। शुरुआत में उन्होंने बेटों से कहा कि छोटा-सा एक्सीडेंट हुआ है और वे घर आ जाएं। उन्हें उस समय परिवार के सदस्यों की मौत की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
सुबह हुए भयावह हादसे के बारे में
दरअसल, राजस्थान के चूरू जिले के सादुलपुर क्षेत्र में ददरेवा के पास तेज रफ्तार कार आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे हुए इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों और कार चालक की मौत हो गई। लेकिन मौत के इस मंजर के बीच नौ माह की मासूम दिव्यांशी की सांसें चलती मिलीं। कार में सीट के नीचे पैरों की तरफ से बच्ची के रोने की आवाज सुनकर मौके पर मौजूद लोग उसकी ओर दौड़े। ग्रामीणों ने उसे बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।
दादा-दादी, मां सहित छह लोगों की मौत, लेकिन बच्ची ईश्वर की कृपा
हादसे में छह लोगों की मौत और एक दुधमुंही बच्ची के बचने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। लोग इसे ईश्वर की कृपा मान रहे हैं। हालांकि, बच्ची के सुरक्षित बचने की सटीक वजह की पुष्टि चिकित्सकीय जांच से ही हो सकती है।
कुछ घंटे पहले लगाया था सोशल मीडिया पर स्टेटस, फिर बदल गई जिंदगी
इस हादसे का सबसे मार्मिक पहलू वह वीडियो है, जिसे छोटी बहू कविता ने घर से निकलने के बाद सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाया था। परिवार के लोग कार में बैठकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए थे। सफर की शुरुआत में सब साथ थे और बच्चों के मुंडन संस्कार को लेकर घर में उत्साह था। जानकारी के अनुसार, कविता आगे की सीट पर बैठी थी और उसकी गोद में जेठानी यशोदा की नौ माह की बेटी दिव्यांशी थी। यशोदा बीच की सीट पर अपने चार माह के बेटे कन्हैया को लेकर बैठी थी। सास महेंद्र देवी भी उनके पास थीं, जबकि ससुर भंवरलाल शर्मा पीछे की सीट पर बैठे थे। कार मांगीलाल नाई चला रहा था।
करीब 55 से 60 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद…
परिवार सुबह करीब 6:15 बजे घर से निकला था। मंजिल गुरुग्राम स्थित कुलदेवी गुड़गांव वाली माता का मंदिर था, जहां दोनों बच्चों का मुंडन करवाया जाना था। लेकिन करीब 55 से 60 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ददरेवा के पास हादसे ने सब कुछ बदल दिया। कुछ घंटे पहले तक साथ सफर कर रहे परिवार के अधिकांश सदस्य वापस घर नहीं लौट सके।
एक साथ चार चिताएं जलीं, गांव में पसरा मातम
हादसे में तारानगर थाना क्षेत्र के सोमसीसर गांव निवासी भंवरलाल शर्मा (60), उनकी पत्नी महेंद्र देवी (55), बहू यशोदा (34), बहू कविता (28), कविता के चार माह के बेटे कैवल्य और कार चालक मांगीलाल नाई (31) की मौत हो गई। यशोदा की नौ माह की बेटी दिव्यांशी घायल है। शाम को जब छहों के शव गांव पहुंचे तो परिवार और ग्रामीणों में चीख-पुकार मच गई। एक ही परिवार के चार सदस्यों—भंवरलाल, महेंद्र देवी और दोनों बहुओं—की चिताएं एक साथ जलीं। गांव का माहौल गमगीन हो गया। घरों में चूल्हे तक नहीं जले।



















