मोकामा विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने पटना हाईकोर्ट से मिली अनंत सिंह की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। संयोग से 30 अक्टूबर को ही दुलारचंद यादव की पहली बरसी भी है।
हत्या को राजनीतिक विवाद बताकर नहीं टाल सकते- सुप्रीम कोर्ट
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि हत्या के मामले को केवल राजनीतिक विवाद के नजरिए से देखना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच जारी है। आगे मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान दर्ज होंगे और उनका परीक्षण किया जाएगा। अदालत ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया। साथ ही पुलिस को चार महीने के अंदर जांच पूरी करने को कहा है। इस आदेश के बाद अनंत सिंह को दोबारा जेल जाना होगा।
दुलारचंद यादव के पोते ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें अनंत सिंह को जमानत मिली थी। उन्होंने अदालत से जमानत रद्द कर विधायक को दोबारा जेल भेजने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप था कि विधायक के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस मामले में बिहार की NDA सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का हवाला दिया। सरकार की ओर से हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे मामलों का जिक्र किया गया।
चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी दुलारचंद यादव की हत्या
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान हुई थी। उस समय अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़ रहे थे। वहीं, दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के चुनावी काफिले आमने-सामने आ गए और विवाद हिंसक हो गया। इस घटना में गोली लगने से दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। हत्याकांड में अनंत सिंह पर आरोप लगे थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
जेल में रहते हुए जीता चुनाव, फिर मिली थी जमानत
गिरफ्तारी के बावजूद अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। इसके बाद मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में जमानत दे दी थी। हालांकि, दुलारचंद यादव के परिवार ने इस फैसले का विरोध किया। उनके पोते नीरज कुमार ने जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।



















