शिलांग। मेघालय की राजनीति में एक समय ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाने वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) पर इस समय अस्तित्व का बहुत बड़ा संकट आ खड़ा हुआ है। पार्टी में मची टूट और बगावत का असर अब सीधे उसके शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है।
पार्टी के भीतर हुए इस बड़े ड्रामे के तहत, UDP के 12 में से 11 विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इनमें से 8 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया है, जबकि 3 विधायक मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की पार्टी एनपीपी (NPP) में शामिल हो गए हैं।
अकेले पड़े पार्टी अध्यक्ष ने छोड़ा मंत्रिमंडल
बड़ी बात यह है कि पार्टी की इस भयानक स्थिति का पहला और बड़ा असर इसके अध्यक्ष पर पड़ा है। विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री मेटबाह लिंगदोह ने शनिवार को मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली ‘मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस’ (MDA) सरकार से अपने कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।
मेटबाह लिंगदोह ने इस्तीफा देते हुए कहा कि जब उनकी अपनी ही पार्टी के 11 विधायक छोड़कर चले गए हैं और वह सदन में पार्टी के इकलौते विधायक बचे हैं, तो ऐसे बदले हुए राजनीतिक हालात में उनका कैबिनेट मंत्री बने रहना नैतिक रूप से सही नहीं है। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि पार्टी के भविष्य को लेकर अभी और भी कई बड़े फैसले लिए जाएंगे।
2023 में थी मजबूत स्थिति, तीन साल में सब बिखरा
बता दें कि 2023 के विधानसभा चुनावों में UDP ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 सीटें जीती थीं और वह खासी-जयंतिया हिल्स क्षेत्र की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन महज तीन साल के भीतर पार्टी के भीतर मची भगदड़ ने इसे फर्श पर ला दिया है।
ऐसे में अब मेघालय की राजनीति में इस बड़े घटनाक्रम के बाद समीकरण पूरी तरह बदलते हुए नजर आ रहे हैं, और सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि बाकी बचे सियासी दल इस उथल-पुथल का क्या फायदा उठाते हैं।



















