राजस्थान के पुष्कर को हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र तीर्थस्थलों में गिना जाता है. यहां बना ब्रह्मा मंदिर देश के उन खास मंदिरों में से एक है, जहां भगवान ब्रह्मा की पूजा-अर्चना होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पुष्कर का संबंध ब्रह्मदेव के यज्ञ और तीन कमल के फूलों से जुड़ा है.
पुष्कर सरोवर, ब्रह्मा मंदिर और माता गायत्री व सावित्री के मंदिर इस जगह को विशेष धार्मिक महत्व देते हैं. यहां आने वाले भक्त सबसे पहले पुष्कर सरोवर के पवित्र घाटों पर स्नान करते हैं. इसके बाद ब्रह्मदेव के दर्शन करते हैं और माता गायत्री, सावित्री व सरस्वती के मंदिरों में पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.
तीन कमल पुष्पों से जुड़ी कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा यज्ञ करने के लिए किसी पवित्र स्थान की तलाश कर रहे थे. इसके लिए उन्होंने तीन कमल के फूल आकाश से पृथ्वी पर गिराए. ये तीनों फूल अलग-अलग स्थानों पर गिरे और वहां पवित्र तीर्थों की स्थापना हुई. पहले फूल के गिरने से ज्येष्ठ पुष्कर, दूसरे से मध्य पुष्कर और तीसरे से कनिष्ठ पुष्कर तीर्थ बना. मान्यता है कि ब्रह्मदेव ने ज्येष्ठ पुष्कर को अपने यज्ञ के लिए चुना था.
ब्रह्मा मंदिर में क्या है खास?
पुष्कर सरोवर में स्नान करने के बाद श्रद्धालु ब्रह्मा मंदिर पहुंचते हैं. यहां भक्त ‘ॐ ब्रह्मदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान के दर्शन करते हैं. मंदिर परिसर में चांदी से बनी कछुए की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है. इसके अलावा यहां एक छोटा चांदी का मंदिर भी है, जिसमें भगवान ब्रह्मा की संगमरमर से बनी सुंदर प्रतिमा स्थापित है. मंदिर के बाहर ब्रह्मदेव के वाहन हंस की प्रतिमा भी देखने को मिलती है. भक्त यहां इंद्र और भगवान शिव की प्रतिमाओं के दर्शन भी करते है.
पुष्कर सरोवर और माता गायत्री का महत्व
पुष्कर सरोवर को हिंदू धर्म के पांच प्रमुख पवित्र सरोवरों में विशेष स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि इसमें स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है. ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के बाद श्रद्धालु पास ही स्थित माता गायत्री के मंदिर पहुंचते हैं. यहां भक्त माता से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं.पुष्कर यात्रा के दौरान श्रद्धालु पर्वत पर बने माता सावित्री के मंदिर भी जाते हैं.



















