केरल सरकार ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2006 के कथित रिश्वत मामले में प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया है। यह मामला उस वक्त का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव और केरल राज्य परिवहन परियोजना (KSTP) के परियोजना निदेशक थे। एक नई शिकायत मिलने के बाद केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने विजिलेंस विभाग से कानूनी सलाह लेने के बाद इस प्रारंभिक जांच को मंजूरी दी।
क्या था 2006 का KSTP मामला और मूल आरोप?
साल 2002 में विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से केरल राज्य परिवहन परियोजना (KSTP) के तहत प्रमुख सड़कों और राजमार्गों को चौड़ा करने का काम शुरू किया गया था। इस परियोजना का निर्माण कार्य PATI-BEL को सौंपा गया था, जो एक इंडो-मलेशियाई कंपनी है। इस प्रोजेक्ट से जुड़ा विवाद नवंबर 2006 में तब शुरू हुआ, जब कंपनी के मुख्य परियोजना प्रबंधक के रूप में काम कर रहे मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन ने मलेशिया में अपने आवास पर आत्महत्या कर ली।
उस वक्त आरोप लगाया गया था कि अपनी मौत से पहले ली सी बीन ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने PWD के वरिष्ठ अधिकारियों पर परियोजना के बिल पास करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। हालांकि यह सुसाइड नोट कभी सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इंजीनियर की मौत के बाद तत्कालीन वामपंथी (CPI-M) सरकार ने दिसंबर 2006 में ज्ञानेश कुमार को PWD सचिव के पद से हटा दिया था और मामले की विभागीय जांच शुरू की थी।
पुराना मामला फिर चर्चा में कैसे आया?
बीते कुछ समय से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी बिच 2006 का रिश्वत मामला फिर से चर्चा में आ गया। कांग्रेस नेता एम. वेणुगोपाल ने केरल के गृह मंत्री को दी याचिका में आरोप लगाया कि 2006 की जांच बाहरी दबाव से प्रभावित थी और इंजीनियर के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का स्पष्ट रूप से जिक्र था। गृह मंत्री ने इस शिकायत को विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो के पास भेज दिया है।
दूसरे शिकायतकर्ता ने क्या दावा किया?
इसी मामले में एक दूसरे शिकायतकर्ता ठेकेदार साजन वी. ओ. ने भी मामले की फिर से जांच करने की मांग की। साजन ने दावा किया है कि कोल्लम में ‘पैटी-बेल’ (PATI-BEL) का कार्यालय उनके घर के पास था और वे ली सी बीन के काफी करीबी थे। साजन वी. ओ. ने आरोप लगाया कि इंजीनियरों द्वारा वेरिफिकेशन किए जाने के बावजूद, लगभग 17 करोड़ रुपये के बिलों के भुगतान को जानबूझकर रोक दिया गया था।
साजन के अनुसार, ली ने उन्हें खुद बताया था कि उस समय के सचिव ने बिल पास करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। जब कंपनी ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो स्थानीय ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान रोक दिया गया। दबाव में आकर ली ने केरल में भुगतान करने के लिए मलेशियाई कंपनी की किसी दूसरी प्रोजेक्ट से फंड का इस्तेमाल कर लिया। जब उन्हें इस अनियमितता का हिसाब देने के लिए मलेशिया में कंपनी के मुख्यालय बुलाया गया, तो उन्होंने आत्महत्या कर ली।
2006 की जांच में क्या सामने आया था?
केरल के गृह मंत्री चेन्निथला ने 14 अक्टूबर को विधानसभा में बताया था कि विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो ने 2006 में KSTP से जुड़ी कई शिकायतों की जांच की थी। इन आरोपों में यह दावा भी शामिल था कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने काम पूरा होने के बाद बिल पास करने के लिए ठेकेदारों से 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। चेन्नीथला के अनुसार, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी और विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।
इसके अलावा, 2003 और 2006 के बीच कथित तौर पर बिना किसी औपचारिक टेंडर प्रक्रिया के दिए गए 76 प्रोजेक्ट्स से जुड़ी एक अलग विजिलेंस जांच में ज्ञानेश कुमार का नाम सामने आया था। ब्यूरो ने इन प्रोजेक्ट्स की जांच शुरू की थी, लेकिन कथित अनियमितताओं की पुष्टि नहीं को सकी, इसलिए कार्रवाई रोक दी गई और सरकार को आगे जांच की जरूरत नहीं होने की रिपोर्ट दी गई।
2012 में कोर्ट ने स्वीकार कर ली रिपोर्ट
2012 में केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान विभाग ने ऐसे आठ मामलों के संबंध में कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी। जिसमें इन मामलों को मिस्टेक ऑफ फैक्ट यानी तथ्यों की गलती बताया गया था। अदालत ने रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी और उसे कभी चुनौती नहीं दी गई।



















