हमीरपुर : जिले की राठ तहसील में दीपावली के दिन ‘दशहरा’ मनाया जाता है। यहां पर दीवाली के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है। यह परम्परा सौ साल पुरानी है। रावण का दहन 14 दिन चलने वाली रामलीला के समापन पर दीपावली के दिन होता है। राठ में वृंदावन से कलाकार राम लीला का मंचन कर रहे हैं। इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। रावण का विशालकाय पुतला बनाया जा रहा है जिसका दीपावली पर दहन होगा। दीपावली पर रावण दहन की परंपरा अलग तो है ही इससे शुरू होने की कहानी भी रोचक है।
हमीरपुर जिला मुख्यालय से 84 किलोमीटर दूर राठ नगर में दीपावली पर रावण का पुतला जलाने के बाद लोग दीपक जलाते हैं। आम तौर पर सभी जगह रावण के पुतले का दहन दशहरा को होता है, लेकिन राठ में दीपावली पर रावण दहन की अनूठी परम्परा है। राठ के बुजुर्गों ने बताया कि यह परम्परा सौ सालों से चली आ रही है। यहां 14 दिनों तक रामलीला का प्रदर्शन होता है। रामलीला मैदान के पास बड़े सरोवर में श्रीराम केवट संवाद की लीला होती है, जिसे देखने के लिए बड़ी भीड़ उमड़ती है। रामलीला कमेटी के हरीमोहन चंदसौरिया ने बताया कि दीपावली के दिन बड़े मेले का आयोजन होता है। रात में ही लंकेश के पुतले के दहन के दौरान भारी जनसैलाब उमड़ता है।
कैसे शुरू हुई रामलीला और रावण दहन की अनूठी परम्परा?
हरीमोहन चंदसौरिया ने बताया कि शुरू में यह कार्यक्रम छोटे स्तर पर होता था लेकिन समय के साथ इस आयोजन का स्वरूप बढ़ता चला गया। उन्होंने बताया कि सौ वर्ष पहले जब रामलीला महोत्सव की शुरू हुआ था तब रामलीला के प्रदर्शन स्थल पर बरसात का पानी भरा रहता था। राठ में दशहरा पर रावण का पुतला फूंकने के लिए कोई अन्य जगह नहीं है। रामलीला स्थल पर पानी को सूखने में दशहरा पर्व निकल जाता था। इसलिए 14 दिन की रामलीला बाद में शुरू हो पाती थी। इसी वजह से रावण दहन दशहरा के बजाय दीपावली के दिन होता रहा। बाद में यह एक परम्परा बन गई।
रामलीला मैदान में रावण के पुतले के लिए फ्रेम
समाजसेवी नीलू महाराज ने बताया कि कई दशक पहले रावण का पुतला तैयार करके रामलीला मैदान में खड़ा किया जाता था। बाद में रावण दहन के लिए कमेटी ने लोहे का एक फ्रेम तैयार कराया। कई सालों से यह फ्रेम ऐसे ही खड़ा है। इसकी ऊंचाई करीब 30 फीट है। इसी फ्रेम में मटेरियल लगाकर इसे रावण का रूप दिया जाता है। आतिशबाजी भी इसमें भरी जाती है। दीपावली के दिन राम-रावण युद्ध के बाद इस पुतले में आग लगाई जाती है। पुतला 20 मिनिट में जल जाता है। रावण के पुतले का दहन होते ही लोग दशहरा के साथ दीपावली मनाते हैं। राठ क्षेत्र के दर्जनों गांवों में दीपावली और दशहरा एक साथ मनाया जाता है।
शिव बरात के बाद शुरू होती है रामलीला
हरिमोहन चंदसौरिया ने बताया कि रामलीला का मंचन के वृंदावन के कलाकार कर रहे हैं। राठ कस्बे में रामलीला शुरू होने से पहले शिव बारात निकाली जाती है। शिव बारात रामलीला मैदान से प्रांरभ होकर खुशीपुरा, भटियाना, चौबट्टा, मुगलपुरा, कोट बाजार, स्टेट बैंक तिराहा होते हुए वापस रामलीला मैदान पहुंचती है। इसमें रामलीला में भाग लेने वाले कलाकार भी शिरकत करते है। इस बार बड़ी संख्या में देवी-देवताओं की झांकियां भी शामिल की गई थीं।



















