यदि आप दो से अधिक बच्चों के माता-पिता हैं, तो आपको किसी भी सरकारी तथा सामाजिक योजना से वंचित नहीं रखा जा सकता। आपको सरकारी सेवा अथवा नौकरी का भी लाभ मिलता रहेगा। आपको चुनाव लडऩे को भी ‘अयोग्य’ करार नहीं दिया जा सकता। बच्चों के प्रजनन और आपकी शारीरिक स्वायत्तता भी संविधान के अनुच्छेद 21 में ‘मौलिक अधिकार’ के तौर पर दर्ज है। अब यह सर्वोच्च अदालत का भी फैसला है। अदालत की चिंता यह है कि देश की औसत प्रजनन दर 1.9 हो गई है। अर्थात माता-पिता औसतन 2 बच्चे भी पैदा नहीं कर रहे हैं। यह ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ (2.1) से भी कम है। यह लेवल वह दर है, जिस पर कोई आबादी बिना घटे ही खुद को बनाए रख सकती है। इस संदर्भ में सर्वोच्च अदालत का निर्णय है कि यदि किसी युगल के घर में 3 बच्चे हैं, तो माता-पिता में से किसी को भी ‘दंडित’ नहीं किया जा सकता। दंडस्वरूप किसी भी सार्वजनिक लाभ, अवसर, परियोजना से ‘वंचित’ भी नहीं रखा जा सकता। शीर्ष अदालत के सामने महाराष्ट्र के काकोड़ा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव का मामला था। जब मंगला के 3 बच्चे हुए, तब उन्हें चुनाव लडऩे के ‘अयोग्य’ करार दे दिया गया। शीर्ष अदालत ने उस ‘अयोग्यता’ के फैसले को खारिज किया है। यही नहीं, सर्वोच्च अदालत के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे ने इस मामले को एक उच्च पीठ के पास भी भेज दिया है। 2003 में हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2 से अधिक संतान पैदा करने वालों को चुनाव लडऩे से वंचित करने के पक्ष में फैसला दिया था। अब उस फैसले पर सर्वोच्च अदालत में व्यापक पुनर्विचार होगा। बहरहाल भारत की आबादी में घटने के कोई भी रुझान या संकेत नहीं हैं, लेकिन बूढ़े, उम्रदराज लोगों की आबादी बढ़ती जा रही है। जनगणना के मौजूदा आंकड़ों के आधार पर 2022-26 में भारत की उम्रदराज आबादी 15 करोड़ से अधिक होगी। 2036 तक यह संख्या करीब 22.7 करोड़ तक पहुंच सकती है। यह कुल आबादी का 15 फीसदी हिस्सा हो सकता है।

2047 तक ‘विकसित भारत’ का सपना और संकल्प पूरा हो अथवा न हो, लेकिन 2050 तक भारत में बुजुर्गों की संख्या 32-34 करोड़ तक पहुंच सकती है। उस बिंदु के बाद हमारी जनसंख्या घटनी शुरू हो सकती है। फिलहाल हम विश्व के ‘सबसे युवा देश’ हैं। गौरतलब यह है कि सरसंघचालक मोहन भागवत ‘अधिक बच्चे’ पैदा करने का आह्वान करते रहे हैं। कुछ साधु-संत किस्म के चेहरे भी ‘कम से कम 4 बच्चे’ पैदा करने की नसीहत देते रहे हैं। जैन मुनि तक अपने धर्म-अनुयायी भक्तों को अधिक बच्चों को जन्म देने का उपदेश देते रहे हैं, क्योंकि जैन समुदाय ‘अत्यंत अल्पसंख्यक’ होता जा रहा है। इन आह्वानों और नसीहतों के सरोकार कुछ भी हों, लेकिन उनकी आड़ में सियासत भी जारी रही है। एक वर्ग ‘जनसंख्या के असंतुलन’ के बयान देकर आरोप चस्पां करता रहा है कि एक खास समुदाय अधिक बच्चे पैदा कर रहा है, लिहाजा देश में आबादी के समीकरण बिल्कुल पलट सकते हैं। बहरहाल हम इन आरोपों को यहीं छोड़ते हैं और संवैधानिक मौलिक अधिकारों का विश्लेषण करते हैं। यदि आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दूसरे बच्चे के लिए 25,000 रुपए, तीसरे बच्चे पर 30,000 रुपए और चौथे बच्चे के लिए 40,000 रुपए नकद देने की हालिया घोषणा की है, तो बुनियादी चिंता यह है कि आंध्र में प्रजनन दर 2 से कम है। भारत में आंध्र के अलावा तमिलनाडु, केरल सरीखे दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या अपेक्षाकृत घटी है। कारण कई हैं, जिनमें परिवार नियोजन भी प्रमुख है। वैसे हम अक्सर दो बच्चों वाली नीति का विरोध सुनते आए हैं और कई राज्यों ने इस नीति को स्वीकार करने या लागू करने से ही अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। ऐसे 15 राज्य हैं, जहां कोई भी नीति लागू नहीं है। आंध्र सरकार ने साल भर के मातृत्व अवकाश और दो माह के पितृत्व अवकाश की भी घोषणा की है। बहरहाल शीर्ष अदालत की चिंता समझनी चाहिए। देश में अब जनसंख्या-विस्फोट की स्थिति नहीं है, लिहाजा प्रजनन दर 1.9 हो गई है। बेशक परिवार नियोजन के अनुशासन और परिवार की गुणवत्ता के साथ-साथ प्रजनन दर भी बेहतर रहे, ताकि भारत ‘बूढ़ा देश’ बनने से बच सके।

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30