नई दिल्ली. मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने अपनी दिनचर्या में धीरे-धीरे वापसी और रोजमर्रा की जिंदगी की अनिश्चितताओं पर एक नोट शेयर किया है. उन्होंने बताया कि कैसे वे कभी-कभी चश्मा, मोबाइल फोन या फिर यह भी भूल जाते हैं कि उन्हें आगे क्या करना है. वहीं, दूसरी ओर उन्हें अपने स्कूल के दिनों की बातें आज भी बहुत साफ-साफ याद हैं.
उन्होंने अपने ब्लॉग फॉलोअर्स, हर रविवार शुभकामनाएं देने वालों और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) के दर्शकों का भी आभार जताया, जो उनके ब्लॉग पर लगातार अपना प्यार, स्नेह और अपनापन बरसाते रहते हैं.
उन्होंने आगे कहा, ‘अरे! मैंने अपना चश्मा कहां रख दिया… मोबाइल कहां है… और सबसे अहम बात… मुझे आगे क्या करना था? कुछ घंटे पहले किए गए काम भी जैसे कहीं खो गए हैं… लेकिन 1960 में स्कूल की 8वीं कक्षा की बातें आज भी बिल्कुल साफ याद हैं… 66 साल पहले की बातें जैसे हथेली पर रखी हों… और अब… बस चीजों को ढूंढ़ता रहता हूं!’
‘रूटीन का भी अपना अलग मिजाज है’
अमिताभ ने लिखा, ‘…और दिनचर्या में धीरे-धीरे वापसी, काम और अन्य चीजों से भरी एक नियंत्रित जिंदगी… जब आप एक रूटीन में होते हैं तो आपको वह रूटीन याद रहता है… लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो रूटीन का भी अपना एक अलग मिजाज बन जाता है… जिसे समझाना मुश्किल है… और यह कभी एक जैसा नहीं रहता.’उन्होंने आगे कहा, ‘अरे! मैंने अपना चश्मा कहां रख दिया… मोबाइल कहां है… और सबसे अहम बात… मुझे आगे क्या करना था? कुछ घंटे पहले किए गए काम भी जैसे कहीं खो गए हैं… लेकिन 1960 में स्कूल की 8वीं कक्षा की बातें आज भी बिल्कुल साफ याद हैं… 66 साल पहले की बातें जैसे हथेली पर रखी हों… और अब… बस चीजों को ढूंढ़ता रहता हूं!’
उन्होंने आगे कहा, ‘अरे! मैंने अपना चश्मा कहां रख दिया… मोबाइल कहां है… और सबसे अहम बात… मुझे आगे क्या करना था? कुछ घंटे पहले किए गए काम भी जैसे कहीं खो गए हैं… लेकिन 1960 में स्कूल की 8वीं कक्षा की बातें आज भी बिल्कुल साफ याद हैं… 66 साल पहले की बातें जैसे हथेली पर रखी हों… और अब… बस चीजों को ढूंढ़ता रहता हूं!’



















