पाटन से लगा ग्राम अखरा जो नगर पंचायत के अंतर्गत आता है, को कौन नहीं जानता, जहां स्वयं भगवान जगन्नाथ स्वामी अपने भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के विराजे हैं। प्रबंधक एवं मुख्य न्यासी भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर ट्रस्ट अखरा के द्वारा बताया गया कि सौ वर्ष पूर्व मनवा कुर्मी समाज के सम्मानित लोगों द्वारा समाज में एकत्रित राशि का क्या उपयोग किया जाये, निर्णय लिया गया कि भगवान जगन्नाथ स्वामी की स्थापना की जाये, पश्चात जगन्नाथ पुरी से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा की प्रतिमा लाकर एक कच्चे खपरैल मकान में मंदिर का रुप देकर भगवान की स्थापना की गई, मंदिर की पूंजी कृषि योग्य भूमि 20 एकड़ 40 डिसमिल भी भगवान के नाम से जो दान से प्राप्त हुई थी नाम करा दी गई। मंदिर में एक पुजारी की नियुक्ति की गई। मंदिर पूजा से प्राप्त एवं कृषि से प्राप्त आय से स्वयं का खर्च तथा मंदिर का समस्त कार्य उसे कराना था। पूजा कार्य के अलावा मंदिर की देखरेख भी उसी के जिम्मे था। लेकिन उसके द्वारा कृषि से प्राप्त आय राशि भी स्वयं व्यव कर दी जाती थी। मंदिर वर्षों तक खपरैलनुमा मकान में संचालित रहा। धीरे-धीरे पुजारी मंदिर की जमीन पर अधिकार जमाकर बेचने की फिराक में लगा रहा। समाज के लोगों को इसकी जानकारी होने पर उसके उपर कानूनी कार्यवाही की जाकर मंदिर की जमीन बचा ली गई। एवं पुजारी को हटा दिया गया। तथा मंदिर ट्रस्ट गठित किया जाकर पंजीयन कराया गया। जिसका पंजीयन लोकन्यास दुर्ग पंजीयन क्रमांक 1/पाटन 88-89 दिनांक 11 जनवरी 1990 है। ट्रस्ट के प्रबंधक श्रीमान जिलाधीश महोदय दुर्ग है। ट्रस्ट गठित कर मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया जिसमें मनवा कुर्मी समाज के लोगों ने राशि एकत्रित कर नये मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जिसे उड़ीसा के कारीगरी द्वारा जगन्नाथ पुरी के मंदिर का स्वरूप दिया। मंदिर 80 फुट लंबा 35 फीट चौड़ा एवं 8 फीट उंचे चबूतरे पर 3 खण्डों में तैयार किया गया है। अभी सामने सभा मंडल का कार्य बाकी है। मंदिर की भीतरी दीवारों पर टाइल्स एवं नीचे फ्लोरिंग पर सफेद मार्बल लगाया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों में भगवान के सभी रूपों को पत्थर पर तरासकर राजस्थान के कारीगरों द्वारा निर्माण कार्य कराया गया है। मंदिर के मुख्य द्वार पर जय-विजय के साथ ही आदमकद सुखदेव मुनि एवं राजा परीक्षित को भागवत सुनाते हुए बनाया गया है एवं उपरी तीस सीढ़ी चढ़ते ही सामने में 2 शेर 5 फीट ऊंचा एवं 10 फीट लंबा बनाया गया है। मंदिर के ठीक सामने सूर्य स्तंभ है। मंदिर प्रांगण में विशाल कदम का वृक्ष मंदिर की शोभा बढ़ा रहा है जिसके छांव में बैठकर दर्शनार्थी आनंद लेते हैं। उपर सभा मंडप हेतु शासन से राशि स्वीकृत की जा चुकी है जिसका निर्माण कार्य अतिशीघ्र प्रारंभ होने जा रहा है। भगवान जगन्नाथ स्वामी वर्तमान में नीचे गर्भगृह में विराजे है। जिन्हे अतिशीघ्र उपर नये मंदिर में यथास्थान स्थापित किया जाना है जिसके लिये पाटन राज के सभी भक्तों से अपील की जाती है कि उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु अधिक से अधिक आर्थिक सहयोग प्रदान करें। ताकि जगन्नाथ भगवान को उड़ीसा के विद्वान पुजारियों द्वारा विधि विधान से स्थापना कराई जा सके। इस हेतु आप सभी महानुभवों से आग्रह है। मंदिर का दर्शन कर आने वाले यही कहते हैं, जगन्नाथ पुरी कहां जाये, भगवान जगन्नाथ का मंदिर अखरा में ही है। भगवान जगन्नाथ मंदिर निर्माण को आकर्षक रूप देने के लिए ट्रस्ट के सदस्य प्रत्यनशील है। श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अमरचंद वर्मा, देवप्रसाद वर्मा, कौशल आडिल, विनोद कश्यप, आशाराम वर्मा, पुस्कर वर्मा, केदार कश्यप, श्याम वर्मा, भोजराम बंछोर, लालाराम वर्मा, शेखर वर्मा, खम्मन बिजौरा, शरद बघेल, रुपेन्द्र वर्मा, वेदनारायण वर्मा, पुरुषोत्तम आडिल, भानुप्रसाद वर्मा, महेन्द्र वर्मा, द्वारिका वर्मा, भूषण वर्मा, मेहतर वर्मा, टीकाराम वर्मा, अभिषेक कश्यप है।

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