ज्योतिष शास्त्र में शनि को प्रभावशाली ग्रह माना गया है. शनि के राशि परिवर्तन से सभी जातकों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है. शनि जब एक राशि परिवर्तन से सभी जातकों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है. शनि जब एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तब कुछ राशि को पर शनि का साढ़े साती सवार हो जाती है. कहा जाता है कि शनि न्यायप्रिय ग्रह हैं. ये लोगों को उनके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं. जातकों पर शनि की अच्छी दृष्टि पडऩे से उसके जीवन में सभी तरह की सुख सुविधाएं प्राप्त होने लगती है जबकि शनि की शापित दृष्टि पडऩे से उनका अनिष्ट होने लगता है. बताते चलें कि शनिदेव 29 सितंबर की सुबह 10 बजकर 28 मिनट से मार्गी हो गए हैं. इससे पहले शनि 11 मई 2020 को वक्री हुए थे. जिनकी जन्मकुंडली में शनिदेव की अशुभ स्थिति थी उनके लिए बहुत बड़ी राहत की खबर है.
बताया जा रहा है कि मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनि मेष राशि में नीचराशि के और तुला राशि में उच्चराशि के माने गए हैं. इनके वक्री और मार्गी होने का प्रभाव जनमानस पर प्रत्यक्ष दिखाई देता है. ज्योतिष के मुताबिक इस बार 12 राशियों में से तीन राशियों पर इस प्रभाव देखने को मिलेगा. जिसमें धनु, मकर और कुंभ राशि शामिल हैं. कहा जा रहा है कि धनु पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण, मकर राशि पर दूसरा चरण और कुंभ राशि पर पहला चरण चल रहा है. इसके अलावा मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है.
करें ये उपाय-
शनिवार की शाम को पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
शनिदेव को शनिवार के दिन तेल अर्पित करें.
इसके अलावा आप शनिदेव को खुश करने के लिए नियमित तौर पर हनुमानजी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ करें.
इसके अलावा काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें और गरीबों को दान दें.
अगर आप की भी हैं ये राशियां, तो हो जाएं सावधान, शनि के मार्गी होने पर करें ये उपाय
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