गुरु बहुत सीधे और भोले होते है। वे अपने शिष्यों को अपनी कला में उस्ताद बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते है। शिष्यों की हर एक कमी को अपनी शिक्षा से दूर कर देते है। वह अपने शिष्यों को हर तरह का ज्ञान देते है। शिष्य जिन्दगी में आगे बढ़ते है तो इसका पूरा श्रेय गुरु के शिक्षा और माता पिता को जाता है। ऐसे ही आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री अरुण चौबे जी महाराज अपने शिष्यों का मार्गदर्शन कर रह रहे हैं और उनके जीवन में आने वाले कठिनाइयों से डटकर मुकाबला करने की सीख देते है। वे जिंदगी के मुश्किलों से अपने शिष्यों को जूझना और लडऩा सिखाते है, अपने शिष्यों को मानसिक तौर पर मजबूत बनाते है, ताकि कोई भी कठिनाई के समक्ष वह अपने घुटने ना टेक दे। इधर शिष्यों का भी यह कहना है कि आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री अरुण चौबे जी महाराज हम शिष्यों के पथ प्रदर्शक है। गुरु ही हमें अज्ञान से बाहर निकालते हैं। आध्यात्मिक गुरु हमें अपनी वास्तविक पहचान कर देते हैं । हमारे अज्ञान के कारण हमें ऐसा लगता है कि, मैं एक व्यक्ति हूं; परंतु वास्तविक रूपसे हम व्यक्ति न होकर आत्मा हैं, अर्थात् ईश्वर ही हममें रहकर प्रत्येक कृत्य करता है; परंतु अहंकाररूपी अज्ञान के कारण हमें लगता है कि, हम प्रत्येक कृत्य करते हैं। सोचो, आत्मा हम में से निकल गई, तो हम क्या कर सकते हैं ? तब ईश्वर ही सभी कुछ करता है। वह अन्न का पचन करता है, वही रक्त बनाता है, इसका भान हमें गुरु कर देते हैं। जैसा कि यह सर्व विदित है कि गुरु की शिक्षा की छत्रछाया में विद्यार्थी एक योग्य और जिम्मेदार व्यक्ति बनता है। कुछ लोग चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करते है। कुछ लोग पुलिस कर्मी बनकर समाज में पनप रहे अपराधो को रोकते है। कुछ लोग शिक्षक बनते है, कोई वकील बनकर कानूनी काम को संभालते है। गुरु की शिक्षा के बिना यह सब कभी संभव ना हो पाता। गुरु की शिक्षा प्राप्त करके व्यक्ति नौकरी करता है और उसे रोजगार करने का मौका मिलता है। आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री अरुण चौबे जी महाराज दरबार के माध्यम से अपने शिष्यों के दुखों का निवारण करते हैं एवं उनकी समस्याओं का समाधान करते है। इस दौरान शिष्यगण भी अपने गुरु के प्रति पूरी आत्मीयता के साथ पूरी श्रद्धा के साथ कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री अरुण चौबे जी महाराज : शिष्यों की हर एक कमी को अपनी शिक्षा से दूर कर देते है
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