बीजापुर। शासन के योजना से लाभान्वित होकर जीवन स्तर में लाया बदलाव वो कहते है ना आम के आम गुठलियों के दाम यह कहावत हमें तब याद आई की जब हम गाम पंचायत संगमपल्ली के राजाराम गोटे से मिले। आदिवासी बाहुल्य एक छोटे से गांव मे पक्की छत के नीचे हंसता खिलखिलाता परिवार। यह परिवार अपने दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर गांव में काफी खुशी से रहता है। हम बात कर रहे है बीजापुर जिले के विकासखण्ड भोपालपटनम के ग्राम पंचायत संगमपल्ली निवासी राजाराम गोटे की। राजाराम गोटे दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए 15 किलो मीटर से लेकर 50 किलोमीटर तक की दुरी तय कर रोजी रोटी कमा कर परिवार का भरण-पोषण करते थे परन्तु यह अब बीते दिनों की बात हो चुकी हैं। राजाराम गोटे को वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अन्तर्गत आवास की स्वीकृति प्रदाय की गयी थी एवं योजनान्तर्गत 1.30 की राशि एवं मनरेगा से 95 दिवस की मजदूरी स्वीकृत की गयी थी राजाराम गोटे मिस्त्री का भी कार्य जानते है जिससे वह स्वयं खेत से मिटटी निकालकर ईंट का निर्माण किया एवं अपने परिवार के साथ मिलकर आवास पूर्ण किया है। अभी वही चार बच्चों और पत्नी के साथ हंसी-खूशी से रह रहे है राजाराम गोटे की पत्नी इमला गोटे बताती है कि पहले छत से टपकता पानी हमें प्रत्येक वर्ष चिन्ता में डाल देता था पर अब हम निश्चिंत होकर रह रहे है। मेरे चारों बच्चे स्कूल जाते है हमें उज्वला योजना से गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ है जिससे मैं अपने बच्चों का भोजन सही समय पर तैयार कर बच्चों को स्कूल भेजती हूं पहले मै लकड़ी के चूल्हे में खाना पकाती थी जिससे मैं कभी भी अपने बच्चों को सही समय पर भोजन नहीं दे पाती थी। राजाराम गोटे ने मोटरसायकिल रिपेयर का कार्य सीखा था जिसे वह अब आवास के सामने एक छोटी सी दूकान खोलकर जीविका का साधन बना लिया है जिसमें वह पंचर/ हवा/मरम्मत का कार्य कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं उन्हें इस कार्य से महीने में 5 हजार तक की आमदनी प्राप्त हो जाती है। राजाराम बीते दिनों को याद कर बताते हैं कि कैसे मैं सायकल से 15 से 50 किलोमीटर तक बरसात/गर्मी को अनदेखा कर मजदूरी करने जाता था। उसके बाद भी मै अपने बडे़ पुत्र राहुल को नही पढ़ा पाया परन्तु मै अपने छोटे पुत्र साहुल और दोनो पुत्रियों को स्कूल भेज रहा हूं। अब मैं पूरे समय घर के सामने रह कर कार्य करता हंू जिससे मैं अपने परिवार को ज्यादा से ज्यादा समय दे पा रहा हूं स्कूल से लौटने के बाद मेरा छोटा पुत्र साहुल भी मेरे काम में हाथ बटाता है मुझे सबसे ज्यादा खुशी आवास बनने से हुई है यदि मुझे योजना से लाभ नहीं मिलता तो मेरे लिये पक्की छतयुक्त आवास बनाना संम्भव नही था परन्तु मेरा सपना इस योजना के माध्यम से पुरा हो गया है जिससे मैं अब सिर्फ बच्चों के भविष्य के बारे में सोचता हूं और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता हूं।
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