असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दशहरा, प्रभु श्री राम की शौर्यगाथा का पर्व दशहरा के दिन दुर्ग जिले के ग्राम लिमतरा में रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन धूमधाम से किया गया। विगत वर्ष कोरोना प्रोटोकॉल के कारण रावण दहन का कार्यक्रम स्थगिति किया गया था। इस वर्ष दशहरा पर्व की तैयारी पहले से ही की जा रही थी और लोग रावण दहन को लेकर उत्साहित नजर आ रहे थे। रावण का लगभग 25 फिट का पुतला तैयार किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम सरपंच श्रीमती मंजू नेताम द्वारा भगवान राम की पूजा अर्चना कर की गई। पूजा अर्चना के उपरांत गांव के लीला मण्डली के कलाकारों द्वारा रावण वध की लीला प्रस्तुत की गई। पहले पूरे 9 दिन रावण वध लीला का आयोजन किया जाता था लेकिन अब लीला के कार्यक्रम को सीमित कर दिया गया है।


इस वर्ष रावण दहन देखने ग्रामीण जन एवं आसपास से आये लोगों की संख्या ने पूरे दशहरा मैदान को भर दिया था। लोगों का उत्साह देखते लायक था। उत्सव के लिए समिति के सदस्यों ने चाकचौबंद व्यवस्था की थी, पूरे मैदान में प्रकाश की विशेष व्यवस्था के साथ दर्शक दीर्घा के लिए बैठक व्यवस्था भी अच्छी तरह से की गई थी। जैसे जैसे लीला अपने अन्तिम चरण की ओर पहुँचता गया उत्साहित लोगों के बीच से “जय श्री राम”, “सियापती रामचन्द्र की जय” , “बोलो-बोलो लखनलाल की जय” आदि जयघोष गूँजने लगे… इन्ही जयघोष के साथ भगवान श्री राम ने रावण पुतले के नाभि में अग्निबाण मारा…एक ओर आतिशबाजी, पटाखे के साथ रावण का पुतला जलता गया दूसरी ओर से भगवान श्री राम का जयघोष गुंजायमान हो रही थी।


कार्यक्रम के समापन में समिति के सदस्यों ने सभी का आभार व्यक्त कर लीला के पात्र को भजन गाते हुए सरपंच के घर होते हुए माँ गायत्री मन्दिर तक ले गए जहां पर पूजा कर कार्यक्रम को विश्राम दिया गया। व्यासपीठ पर पं श्री परमेश्वर तिवारी, श्री रामनारायण शर्मा, श्री रमेश चौबे, श्री सुंदरलाल पटेल, श्री वासुदेव यादव, तबला वादक श्री घनश्याम यादव, श्री केशव पटेल, श्री जुगल मढ़रिया एवं लीला के पात्र में मनीष साहू द्वारा भगवान राम, राहुल वर्मा द्वारा लक्ष्मण, रवि देवांगन द्वारा हनुमान, हिमांशु गोस्वामी द्वारा अंगद, भानु पटेल विभीषण, आदेश यादव द्वारा रावण, हेमराज निषाद, रमेश वर्मा, हरिहर सेन आदि विदूषक के रूप में अपना अभिनय प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।


















