
रायपुर। राज्य के पेंशनरों की समस्याओं को लेकर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने बताया है कि पेंशनरों को महंगाई राहत देने मामले में दोनों राज्य सरकारों की आपसी सहमति का होना मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के तहत नितांत अनिवार्य मजबूरी है.इसी कारण पेंशनरों को महंगाई राहत देने में पेंच फँस गया है. क्योकि पेंशनरों को 5त्न महंगाई राहत देने की 3 सितम्बर को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा पर छत्तीसगढ़ शासन ने मध्यप्रदेश शासन से इसके लिये नियमानुसार सहमति माँगा है, परन्तु मध्यप्रदेश सरकार ने सहमति तो दी नही,उल्टे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने पेंशनरो को 8त्न महँगाई राहत देने की घोषणा कर दी है.चूंकि राज्य पुनर्गठन अधिनियम में दिये गए प्रावधानों के अनुसार दोनों सरकार दोनों राज्य के पेंशनरों को एक समान, एक दर पर महँगाई राहत देने बाध्यता से बंधे हुये हैं. उन्होंने पेंशनरों की इस दुविधा जनक आर्थिक संकट के लिए राज्य के ब्यूरोक्रेसी के साथ साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनो को चिन्ता नही होने को दुर्भाग्यजनक मानते हुये कहा है छत्तीसगढ़ निर्माण के 21वर्षो बाद भी राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 को हटाने में आज तक ध्यान नही देने पर चिन्ता जाहिर किया है। जबकि छत्तीसगढ़ के साथ ही बने दो अन्य राज्य झारखंड और उत्तराखंड में यह समस्या नहीं है.क्योकि उन्होंने समय रहते इस समस्या का निदान कर लिया। इन सभी मामलों पर लापरवाही के लिए ब्यूरोक्रेसी ही मुख्यरूप से जिम्मेदार है। इसलिए जिम्मेदारी तय कर छत्तीसगढ़ सरकार को उन पर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर पुनरावृत्ति न हो। जारी विज्ञप्ति में बताया है कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम के छटवीं अनुसूची की धारा 49 को विलोपित कर पेंशनरी दायित्व का बंटवारा आपस मे नही होने के कारण नियमो के तहत 74 प्रतिशत राशि का भुगतान मध्यप्रदेश सरकार को और 26 प्रतिशत राशि का भुगतान छत्तीसगढ़ सरकार को मध्यप्रदेश के 05 लाख और छत्तीसगढ़ के 01 लाख पेंशनरों को इस तरह कुल 6 लाख से अधिक पेंशनर और परिवारिक पेंशनरों मिलकर करना होता है इसके लिए दोनो राज्य सरकारों में आपसी सहमति नही होने पर कोई भी भुगतान करना सम्भव नही हैं और इसी भुगतान के खेल में छत्तीसगढ़ सरकार को इन 21 वर्षो में अरबो रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है जो लगातार जारी हैं। उन्होनें उदाहरण देते हुये बताया है कि प्रत्येक पेंशनर को नियमानुसार 74 प्रतिशत राशि मध्यप्रदेश द्वारा और 26 प्रतिशत राशि छत्तीसगढ़ द्वारा दिया जाना है अर्थात 100 रुपये में 6 लाख पेंशनर को मध्यप्रदेश 74 प्रतिशत और इन्ही सभी पेंशनरों को 26 प्रतिशत छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने से देने पड़ेंगे। हिसाब लगाने पर इसमें मध्यप्रदेश को 44 करोड़ 44 लाख व्यय करना पड़ेगा और छत्तीसगढ़ सरकार को 1 करोड़ 56 लाख व्यय होगा। परन्तु यदि मध्यप्रदेश अपने 5 लाख पेंशनर को 100 प्रतिशत भुगतान करता है उसे 5 करोड़ और छत्तीसगढ़ सरकार अपने 1 लाख पेंशनरों के केवल 1 करोड़ खर्च करने होंगे। इसतरह केवल 100 रुपये के भुगतान मे ही छत्तीसगढ़ शासन को 56 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार जानबूझकर 20 साल से पेंशनरी दायित्व को टालते आ रही है। जारी पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव, पेंशनर एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष यशवन्त देवान,प्रगतिशील पेन्शनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर पी शर्मा तथा भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा ने मांग किया है कि दोनों राज्य सरकारें आपस मे सहमत होकर दीपावली के पूर्व 31 प्रतिशत महंगाई राहत देने की आदेश जारी कर भुगतान की व्यवस्था करें।



















