पश्चिम बंगाल सरकार ने उन 1000 संविदा कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निकालने आदेश दे दिया है जिन्हें उसने विभिन्न निजी एजेंसियों के माध्यम से स्कूल लेबोरेटरीज में ट्रेनिंग के लिए नियुक्त किया गया था। अब ये 1000 संविदा कर्मचारी रविवार से पूर्वी मिदरनापुर के तमलुक के व्यावसायिक विभाग कार्यालय के सामने राज्य सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अक्टूबर को चैरिटेबल ट्रस्ट्स और निजी शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों को राज्य व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशक ने तत्काल प्रभाव से अतिरिक्त कर्मचारियों को निकालने का निर्देश दिया था। इन व्यावसायिक शिक्षकों और लैब कर्मचारियों को 7000 रुपये से लेकर 20 हजार रुपये की सैलरी मिलती है। ये सभी कर्मचारी राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के ग्रेजुएट हैं, जो 2013 में लागू एक योग्यता-आधारित फ्रेमवर्क है। बंगाल के तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रभारी मंत्री हुमायूं कबीर ने बताया कि इन संविदा कर्मचारियों को निजी एजेंसियों के माध्यम से अल्पकालिक आधार पर केंद्र सरकार की योजना के तहत स्कूलों में नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्र ने लैब असिस्टेंट के पदों को बंद करने का फैसला किया है। प्रति स्कूल दो के बजाय एक व्यावसायिक प्रशिक्षक रखने का भी निर्णय लिया। इसी कारण शिक्षा विभाग को स्कूलों से अतिरिक्त कर्मचारियों के पदों को खत्म करने के लिए प्रोत्साहित किया। हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या नौकरी गंवाने वालों को कहीं और समायोजित किया जा सकता है।
1000 संविदा कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया, राज्य सरकार के खिलाफ धरना
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