केन्द्र के समान 31 प्रतिशत महंगाई राहत नही देने के विरोध में मतदान करेंगे पेंशनर

वित्त सचिव भी अनभिज्ञ धारा 49 की समस्या से

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के सेवा में पूरा जीवन बिताने के बाद अब जीवन के अंतिम चरण में पेंशनधारी सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारीगण सरकार की उपेक्षा से त्रस्त होकर राज्य में 20 दिसम्बर को सम्पन्न होने वाले 15 नगरीय निकाय के आमचुनाव और 16 निकाय के उप चुनाव में पहली बार खुलकर अपनी वोटों की ताकत दिखाएंगे। उक्त बातें जारी विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कही है। जारी विज्ञप्ति में उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर पेंशनरों के समस्याओं के निदान को विगत कई वर्षों से अनदेखा करते आ रही है। राज्य विभाजन के 21 वर्षो के बाद आज भी आर्थिक मामलों में मध्यप्रदेश सरकार की गुलाम बनी हुई है और केन्द्र के समान 31त्न महँगाई राहत की राशि के आदेश को मध्यप्रदेश शासन की सहमति नही मिलने के नाम पर जारी नहीं कर पेंशनरो को परेशान कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन का कहना है कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के विलोपित नहीं होने के कारण यह अनिवार्य बाध्यता है। जिसके नियमों में महंगाई राहत एवं अन्य आर्थिक भुगतानों में दोनों राज्यों की आपसी सहमति जरूरी है। नियमों के प्रावधान के अनुसार छत्तीसगढ़ के लगभग 1लाख और मध्यप्रदेश के करीब 5 लाख पेंशनर्स को मध्यप्रदेश के बजट से 74 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ से 26 प्रतिशत राशि का आबंटन करने पर ही पेंशनरों को आर्थिक लाभ देंना सम्भव है अन्यथा वित्त विभाग आदेश जारी करने में सक्षम नहीं है। उल्लेखनीय छत्तीसगढ़ राज्य के साथ ही बने दो राज्य उत्तराखण्ड और झारखंड ने धारा49 की समस्या को पहले ही सुलझा चुकी है और दोनों ने पेंशनरो को केन्द्र के बराबर 31त्नप्रतिशत महंगाई राहत देने के आदेश भी जारी कर चुके हैं। इस बन्धनकारी नियमों के जानकारी के बाद भी इस 21 वर्षो में 3 मुख्यमंत्री के सरकारों में किसी ने इस समस्या को दूर करने में कोई रुचि नहीं ली। दोनों राज्य के पेन्शनर भी नियमो की अज्ञानता के कारण शान्त रहे परन्तु करीब 2017-18 से यह बात पेंशनरो के संज्ञान में आने के बाद लगातार पत्राचार, चर्चा, धरना, प्रदर्शन आदि द्वारा सरकार का ध्यानाकर्षण करते आ रहे हैं, मगर सरकार कानों में जूं नही रेंग रहा है। इसीलिये इस नियम को हटाने के दिशा में अबतक कोई काम नही किया है क्योंकि प्रदेश के आईएएस को भी इस बारे में सही जानकारी नहीं है, यह बात विगत दिनों पिगुआ कमेटी की बैठक वित्त सचिव से चर्चा में उजागर हुआ जब उन्होने इस पर अलग से बैठने और समझने की बात की परन्तु आज दिनाँक तक वित्त सचिव द्वारा पेंशनर फेडरेशन को समय नही देने के कारण इसपर चर्चा लंबित है। जारी विज्ञप्ति में पेंशनर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव तथा फेडरेशन से जुड़े पेन्शनर यूनियन क्रमश: छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ.डीपी मनहर, प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर पी शर्मा, भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जेपी मिश्रा व पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष यशवन्त देवान ने बताया है कि राज्य के पेंशनर केन्द्र के समान 31त्न प्रतिशत महंगाई राहत के आदेश के इंतजार में जीवन के अंतिम पड़ाव में निराश हैं। जबकि राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा और बिजली विभाग में पेंशनरो एवं सेवारत लोगों को केन्द्र के बराबर 31त्न महंगाई राहत राशि देने के आदेश दिये हैं जबकि राज्य शासन के सेवानिवृत्त पेंशनर और परिवार पेंशनर्स को मात्र 12त्न ही महँगाई राहत देने के आदेश है जो सेवारत राज्य के अधिकारियों-कर्मचारियों को दिये जा रहे महंगाई भत्ता 17 प्रतिशत से भी 5 प्रतिशत कम है। जारी विज्ञप्ति में उन्होंने सरकार को चेतावनी दिया है कि पेंशनरों के उपेक्षा का परिणाम सरकार को स्थानीय निकाय में भुगतना पड़ेगा राज्य के पेंशनर खुलकर अपनी वोट की ताकत का एहसास कराने में इस बार पीछे नहीं रहेंगे।

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