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परमार्थ का लक्ष्य रखने वालों का स्वार्थ स्वतः सिद्ध हो जाता है। परलोक का ध्यान करनेवालों का लोक स्वयं सुधर जाता है। परहित की भावना बनी रहे तो अपना हित स्वयं हो जाता है। और यह सब परमात्मा हीं करता है।कहकर केवल कृपा पात्र बनने का प्रयास न करो। यह एक बार सफल होता है । किन्तु गुरु/परमात्मा का कार्य करते रहोगे तो तुम्हारा कोई कार्य कभी रुकेगा हीं नहीं। अपनी क्षमता से बढ़कर कार्य करो,वो भी तुम्हारी अवकात से कई गुणा अधिक दे देगा, जितने की तुम कभी कल्पना में भी नही सोंच सकते।

शिक्षा:–आदेश का पालन बिना किसी किन्तु-परन्तु के करते जाओ। आदेश देनेवाला तुम्हारी इच्छा होने के पूर्व हीं इच्छा पूर्ण कर देगा। सदैव आनंद में रहोगे।

जय माँ

संकर्षण शरण (गुरु जी), प्रयागराज ।

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