सुकमा ज़िले में विकासखंड कोण्टा के 123 बंद शालाओं का हुआ पुनः संचालन

सुकमा। लाल आतंक के लिए देश-दुनिया में पहचाने जाने वाले सुकमा ज़िले के कोण्टा विकासखंड में सलवा जुडूम और नक्सलवाद के चलते 15 साल से बंद स्कूलों को ग्रामीणों की पहल पर ज़िला प्रशासन के प्रयासों से फिर से शुरू करने में सफलता मिली है। ग्रामीणों के साथ शिक्षक व विभागीय अधिकारियों के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि आज आज एक बार फिर से सुदूर वनांचलों में रहने वाले बच्चों का भविष्य संवरने लगा है।
पंद्रह साल पहले नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए सलवा जुडूम अभियान के दौरान नक्सली हिंसा के चलते विकासखंड कोण्टा के 123 स्कूल बंद करा दिए गए थे। नक्सलियों ने दर्जनों स्कूल भवनों को ढहा दिया था। जिनमे 100 प्राथमिक, 22 माध्यमिक एवं 01 हाईस्कूल शामिल है। अंदरूनी इलाकों में स्कूल भवनों को माओवादियों ने इसलिए ढहा दिया था, ताकि फोर्स वहां ना रुक पाए।
प्रदेश के उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा के मार्गदर्शन में बीते तीन वर्षाें से ऐसे स्कूलों को दोबारा खोलने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमे बहुत बड़ी सफलता मिली है। ग्रामीणों के सहयोग से जिला प्रशासन सुकमा ने पंचायतों के माध्यम से शाला संचालन के लिए झोपड़ियां तैयार की। इसके लिए जिला प्रशासन ने प्रत्येक शाला के लिए अस्थायी शेल्टर निर्माण के लिए 40000 रुपये का प्रावधान किया। प्रशासन इन ग्रामों के ऐसे सभी बच्चों को जो 15 वर्षों से अधिक समय तक शिक्षा से वंचित रह गए थे इनके लिए सुविधाओं को जुटाने में कोई कमी न हो इस प्रयास में निरंतर काम कर रहा है। इसके चलते नक्सलियों द्वारा ढहा दिए भवनों व झोपड़ियों के स्थाम पर पक्के भवन बनना शुरू हो चुका है। पहले चरण में 45 शाला भवन बनकर तैयार हो चुके है, 49 भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
स्थानीय शिक्षित युवाओं को मिला रोजगार
सुदूर वनांचलों में बसे इन अति संवेदनशील ग्रामों में बच्चों को पढ़ाने के लिए स्थानीय स्तर पर स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को चिन्हांकित कर सबसे पहले इन्हें अध्यापन कार्य के लिए प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षित किये गए ऐसे 97 युवकों को पंचायत स्तर पर नियुक्त किया गया। इन्हें ज़िला प्रशासन की तरफ से प्रतिमाह ग्यारह हजार रुपये का मानदेय प्रदान किया जाता है। इन शिक्षादूतों ने इन ग्रामों के ऐसे लगभग 4000 से अधिक बच्चों को चिन्हांकित किया जो शाला और शिक्षा से वंचित हो चुके थे। वर्ष 2019 से यह कवायद आज भी निरन्तर जारी है।
नक्सली आंतक की भेंट चढ़ा चिंतलनार स्कूल अब बच्चों से है गुलजार
नक्सल हिंसा के प्रभाव के चलते बन्द हो चुके हाई स्कूल चिंतलनार को कलेक्टर श्री विनीत नन्दनवार के मार्गदर्शन में सत्र 2021-22 में पुनः प्रारंभ किये जाने के बाद अब यहां के बच्चों को कहीं भटकना नहीं पड़ रहा है। इस इलाके के अति संवेदनशील और नक्सल हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित ग्राम जगरगुंडा का हायर सेकंडरी स्कूल, माध्यमिक शाला, कन्या/बालक छात्रावास जो बीते वर्षों दोरनापाल में संचालित किया जा रहा था, वह अब सर्व सुविधाओं के साथ जगरगुंडा में ही संचालित किए जा रहा है। इस तरह ग्राम भेज्जी, किस्टाराम, गोलापल्ली, सामसट्टी की शिक्षण एवं आवासीय संस्थाएं जो कि कोण्टा, मरईगुड़ा, दोरनापाल मुख्यालय में संचालित की जाती रही अब वह सम्पूर्ण सुविधाओं के साथ उनके मूल ग्रामों में संचालित किए जाने से यहां के विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बड़ा है।
निश्चित ही यह ग्रामीणजनों के साथ शासन-प्रशासन के आपसी समन्वय, तालमेल, संवाद और मजबूत संकल्प और प्रतिबद्धता का ही सुखद परिणाम है कि आज वर्षों का अंधेरा छठ गया रोशनी की नई किरण से सुदूर वनांचल में उत्साह की नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

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