बीजापुर जिला में अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार कोई बड़ी बात नहीं है।ईंट भट्ठों को जलाने इमारती और फलदार पेड़ो को धड़ल्ले से काटा जा रहा है।हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने लाल ईंट भट्टा पर रोक लगाने की बात अपने आदेश जारी करते हुए वर्षों पहले कह दिया है। हां,उन आदेशों का पालन सही मायने में नहीं हो पा रहा है।यह एक बड़ा सवाल है।माननीय सर्वोच्च न्यायालय और NGT के आदेशों का पालन करने और करवाने हेतू सरकार ने हर जगह खनिज विभाग एवं कर्मचारी और अधिकारी नियुक्त किए हुए है,जिन्हें आम जनता के काठी मेहनत और पसीने की कमाई से प्रति माह वेतन और तनख्वाह दिया जाता है।

जब जनता के हितों से जुड़े हुए मुद्दों पर अधिकारी और कर्मचारी खामोश होकर शांत बैठे रहे तो माननिय उच्च न्यायालय और NGT के आदेशों का क्या फायदा ? प्रदेश में लगातार कृषि योग्य भूमि का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है।जिसमें शासन और प्रशासन से जुड़े हुए अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद है।ज्ञात हो कि यह नाजारा बीजापुर जिला अंतर्गत भी वर्षों से देखी जा रही है,जिस पर जिला प्रशासन ने अब तक माकूल कार्यावाही नही किया है परिणामस्वरूप जिला में लाल ईंट भट्टों का मकड़जाल में जिला के कृषि योग्य भूमि पर भी लाल सोने की फसल लहलहा रही है।

सर्वोच्च न्यायालय और NGT की अवहेलना

माननीय सर्वोच्च न्यायालय और NGT ने लाल ईंट भट्टा को पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से अनुपयोगी मानते हुए इस पर रोक लगाने का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि लाल ईंट भट्टा में लाल ईंटों को पकाने हेतू प्राकृतिक तौर पर इस्तेमाल होने वाले इधन से मानव जीवन पर खतरा बना रहता है और यही मानव अपनी रात दिन मेहनत से कमाई हुई पैसों को अधिकारी और कर्मचारियों को वेतन देने हेतू सरकार को टैक्स के रूप में दान करती है,ताकि उनके सेवा हेतू पदस्थ अधिकारी और कर्मचारियों को उनकी मेहनताना सही समय पर मिल सके।

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