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रायपुर। छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार हरेली पूरे अंचल में मनाया जाता है खास बात यह है कि इस दिन किसान खेत खलिहान में कृषि औजार, गेड़ी आदि की पूजा अर्चना करते हैं, साथ ही गांव में गेड़ी दौड़, नारियल फेक जैसी कई स्पर्धाएं आयोजित की जाती है। डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर ने बताया कि प्रात: गांव का बैगा द्वारा घर-घर जाकर चौखट में कील् लगाई जाती है, एवं नीम की डाल लगाता है, ताकि उस घर को किसी की बुरी नजर ना लगे, दूसरी और ऐसी मान्यता है कि नीम की डाल के कारण घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है, विषाणु नष्ट होते हैं गांव में घरों की दीवारों पर गोबर से श्री हनुमान जी का चित्र बनाया जाता है ताकि भूत-प्रेत उस घर में प्रवेश नहीं कर सके, माना जाता है कि हरेली के दिन खेत में नागर कुदाली फावड़ा आदि का काम पूरा हो जाता है, इसलिए आज के दिन कृषि औजार नांगर,कुदाली, गैती, रापा, सहित खेती बाड़ी के काम में आने वाले औजारों की पूजा की जाती है, पशुधन को औषधि खिलाई जाती है, इस दिन बैलों के साथ गायों की पूजा अर्चना की जाती है।

आगे डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर ने कहा कि हरेली में ग्रामीणों द्वारा अपने कुल देवताओं का भी विशेष पूजन किया जाता है गेड़ी आदि की पूजा अर्चना कर चीला, फरा, सोहारी गुलगुला भजिया आदि का भोग लगाया जाता है इसके पश्चात सभी घर के सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं, बच्चे पूजा के बाद गेड़ी पर चढ़कर गांव की गलियों सड़कों पर इस त्योहार को मनाते हैं। हरेली का मुख्य आकर्षण गेड़ी ही होती है, जो हर उम्र के लोगों को लुभाती है यह बांस से बना एक सहारा होता है जिसके बीच में पैर रखने के लिए खाड़चा बनाया जाता है गेड़ी की ऊंचाई हर कोई अपने हिसाब से तय करता है कई जगहों पर 10 फीट से भी ऊंची जोड़ी भी देखने को मिलता है।

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