रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की संस्कारधानी राजनांदगांव जिले में एक गोपालक संस्थान गाय के पंचगव्य से निर्मित 95 प्रतिशत पूर्णत: स्वदेशी राखियों का उत्पादन कर रहा है। पिछले पांच वर्षों से संचालित यह स्वदेशी राखी का कारोबार देश ही नही विदेशों में भी फैला हुआ है। चीनी उत्पादों के बहिष्कार के दौर में स्थानीय हुनरमंदों द्वारा गोबर की राखियां बनाई जा रही हैं।

मां पंचगव्य चिकित्सा एवं अनुसंधान से जुड़े आर्य प्रमोद के अनुसार गौ संरक्षण के उद्देश्य से पांच साल पहले गौ उत्पाद बनाने की उन्होंने शुरूआत की। शुरू-शुरू में धूपबत्ती बनाया जा रहा था धीरे-धीरे इसमें सृजनात्मक प्रयोग किए गए और गोबर के गौरी-गणेश बनाए गए जैसे जैसे सफलता मिलती गई हमने नई वस्तुओं का निर्माण भी प्रारंभ कर दिया, हमने पांच साल पहले गोबर की राखियां बनाई थी।

मौली गौबर से बनाई गई राखियां पसंद की गई हमारे द्वारा पहले साल में लगभग 5 हजार गोबर राखियों की बिक्री हुई। इस गोबर की राखियां की स्थानीय बाजार में तो मांग रही ही विदेशो में भी हमने इसकी सप्लाई की, इस वर्ष उन्हें उम्मीद है कि लगभग 50 हजार राखियों की बिक्री होगी क्योंकि चाइना के राखियों का भी बहिष्कार किया जा रहा है।

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