विजय दशमी पर जहां सारा देश रामलीला और रावण वध करता है वहीं बस्तर के आदिवासी अपने आराध्य को रथारुढ़ कर आस्था प्रकट करते हैं। आदिवासियों में रावण दहन की परंपरा नहीं है। दशहरा के मौके पर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ अंचल की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उत्तर भारत से आकर बसे लोगों ने कुछेक जगहों पर रामलीला और रावण दहन कार्यक्रम की शुरुआत की है।

धार्मिक ग्रंथों में बस्तर को दंडकारण्य वन और राक्षसों का क्षेत्र बताया गया है। बावजूद यहां देवी पूजा होती है और लोग शिव के साथ राम व देवमाता (दुर्गा) की पूजा करते हैं। बस्तर दशहरा 75 दिनों तक मनाया जाता है और नवरात्र में माईजी के मंदिर में ज्योत जलाने के साथ 9 दिनों तक उपासना की जाती है।

इस दौरान सीरासार में आदिवासी समुदाय का एक युवक चार फीट के गड्ढे में 9 दिनों की साधना करता है। इस अवधि में शाम को दुमंजिला काष्ठ रथ परिचालन होता है। अष्टमी-नवमी को विराम के बाद विजय दशमी के दिन चार और आठ चक्कों वाले दो परिचालन होता है और लोग उत्सव मनाते हैं। लेकिन विजय दशमी में यहां रावण का वध नहीं होता। यहां का राज परिवार देवी दंतेश्वरी का उपासक है। आदिवासी भी माईजी व प्रकृति के पूजक हैं।

विजय दशमी पर जहां सारा देश रामलीला और रावण वध करता है वहीं बस्तर के आदिवासी अपने आराध्य को रथारुढ़ कर आस्था प्रकट करते हैं। आदिवासियों में रावण दहन की परंपरा नहीं है। दशहरा के मौके पर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ अंचल की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। उत्तर भारत से आकर बसे लोगों ने कुछेक जगहों पर रामलीला और रावण दहन कार्यक्रम की शुरुआत की है।

धार्मिक ग्रंथों में बस्तर को दंडकारण्य वन और राक्षसों का क्षेत्र बताया गया है। बावजूद यहां देवी पूजा होती है और लोग शिव के साथ राम व देवमाता (दुर्गा) की पूजा करते हैं। बस्तर दशहरा 75 दिनों तक मनाया जाता है और नवरात्र में माईजी के मंदिर में ज्योत जलाने के साथ 9 दिनों तक उपासना की जाती है।

इस दौरान सीरासार में आदिवासी समुदाय का एक युवक चार फीट के गड्ढे में 9 दिनों की साधना करता है। इस अवधि में शाम को दुमंजिला काष्ठ रथ परिचालन होता है। अष्टमी-नवमी को विराम के बाद विजय दशमी के दिन चार और आठ चक्कों वाले दो परिचालन होता है और लोग उत्सव मनाते हैं। लेकिन विजय दशमी में यहां रावण का वध नहीं होता। यहां का राज परिवार देवी दंतेश्वरी का उपासक है। आदिवासी भी माईजी व प्रकृति के पूजक हैं।

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