खगोलीय घटनाओं के इतिहास में एक दिलचस्प घटना घटी है. एक दुर्लभ धूमकेतु धरती के करीब से गुजरा है. यह घटना इसलिए दिलचस्प है क्योंकि ऐसा पिछले 50 सालों में पहली बार हुआ है. धरती के करीब आने पर यह चमकता हुआ नजर आया.

इस दुर्लभ धूमकेतु ग्रीन कॉमेट कहा जा रहा है. वहीं, विज्ञान की भाषा में इसे C/2022 E3 नाम दिया गया है.

खगोल विज्ञानियों ने इस दुर्लभ धूमकेतु को 2 मार्च 2022 को खोजा था. इसे कैलिफोर्निया में ज़्विकी ट्रांसिएंट फैसिलिटी के वाइड फील्ड सर्वे कैमरा की मदद से खोजा गया था. 12 जनवरी को यह धरती के सबसे करीब नजर आया.

क्या है धूमकेतु?

धूमकेतु सौरमंडल का हिस्सा होते हैं. ये धूल, पत्थर, बर्फ और गैस से बने होते हैं. जो टुकड़ों के रूप में नजर आते हैं. यह अलग-अलग ग्रहों की तरह सूर्य की परिक्रमा करते हैं. इस तरह लाखों धूमकेतु सूर्य का चक्कर लगा रहे हैं. इन्हें पुच्छल तारा भी कहते हैं. उल्कापिंड के मुकाबले धूमकेतु ज्यादा तेजी से चक्कर लगाते हैं.

सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हुए ये सूर्य के करीब आ जाते हैं और गर्म होकर चमकने लगते हैं. इस तरह ये चमकने वाले वाले पिंड के रूप में नजर आते हैं और जब मूव करते हैं तो टूटे हुए तारे की तरह नजर आते हैं.

कितना अलग है ग्रीन कॉमेड?

  1. इसलिए कहते हैं डर्टी स्नोबॉल: यह धरती के करीब पहुंचा. इसकी गर्माहट बढ़ने पर यह चमकते हुए नजर आया. सूर्य के करीब पहुंचते ही इसके अंदर मौजूद बर्फ वाला हिस्सा तेजी से पिछलने लगता है. इसलिए इसे डर्टी स्नोबॉल भी कहा जाता है.
  2. पाषाणकाल के दौरान बना: टेलीस्कोप से मिली जानकारी के मुताबिक, यह धूमकेतु करीब 50 हजार साल पुराना है. अनुमान लगाया गया है कि यह पुरा पाषाणकाल के दौरान सौरमंडल में बना होगा. यह उस दौर में सामने आया होगा, जब निएंडरथल धरती पर नजर आते थे.
  3. ऐसे ली गई पहली तस्वीर: ग्रीन धूमकेतु की पहली तस्वीर लद्दाख में लगी हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप के जरिए ली गई थी, जिसे बेंगलुरू का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स ऑपरेट करता है. पहली फोटो जब ली गई जब ये अंदर के ग्रहों से सूर्य की तरफ जाता हुआ नजर आ रहा था. इसके पिछले हिस्से में एक पूंछ जैसी नजर आ रही थी. जिसकी वजह से इसे पुच्छल तारा भी कहा जाता है.
  4. 10 फरवरी को मंगल के करीब पहुंचेगा: अर्थस्काई की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी घटना दोबारा 10 फरवरी 2023 को होगी जब धूमकेतु मंगल ग्रह के करीब से गुजरेगा. खगोल वैज्ञानिकों के पास दोबारा इस घटना को कैमरे में कैद करने का मौका मिलेगा. वैज्ञानिकों ने इस घटना को काफी दिलचस्प माना है क्योंकि उम्र के लिहाज से देखें तो यह ग्रह काफी पुराना. अब तक इतने पुराने धूमकेतु कम ही खोजे जा सके हैं. इसलिए यह घटना अहम रही.

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