दो सीटों पर लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा है कि यह विधायी मामला है.सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह विधायी नीति का मसला है. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह इसलिए गलत है क्योंकि जिस सीट को छोड़ा जाता है, वहां पर दोबारा चुनाव होता है और वोटर को दोबारा आना पड़ता है. यह अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है. सीजेआई ने कहा चुनाव लड़ने वाला पहले से कहां जानता है कि दोनों सीटों पर जीत हासिल करेगा. यह नीतिगत मामला है. वकील ने कहा कि विधि आयोग ने भी इस पर अपनी रिपोर्ट दी है. इस पर सीजेआई ने कहा कि एक बार संसद ने दो सीटों पर चुनाव लड़ने पर सीमा तय कर दी थी. अगर उसे लगेगा तो कदम उठाएगा. कोर्ट सीधे तौर क्यों हस्तक्षेप करे, जबकि यह विधायी मामला है. वकील ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया समेत अधिकर देशों में स्थापित लोकतंत्र में सिर्फ एक सीट से चुनाव लड़ने का प्रावधान है. याचिकाकर्ता की ओर से अनुच्छेद 32 के तहत जन प्रतिनिधित्व कानून-1951 की धारा 33(7) की संवैधानिकता को चुनौती दी. इसमें केंद्र और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई. कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग, याचिकाकर्ता के पक्ष पर गौर करने के बाद यह निर्णय लिया है कि यह एक विधायी नीति का मुद्दा है. लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया में संसद इस पर विकल्प दे सकता है. संसद ही इस पर कदम बढ़ा सकता है. यह अदालत ऐसे में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी. याचिका का हम निपटारा करते हैं. चुनाव आयोग ने पहले शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में चुनाव सुधारों पर अपने 2004 के प्रस्तावों को उद्धृत किया था और कहा था कि यह सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन किया जाना चाहिए कि एक व्यक्ति एक से अधिक सीट से चुनाव नहीं लड़ सकता है.
नेता दो सीटों से लड़ सकेंगे चुनाव? सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से तस्वीर की साफ
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