जलवायु परिवर्तन के कारण हाल के वर्षों में भारत में हीटवेव पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गई हैं. हीटवेव असामान्य रूप से उच्च तापमान की लंबी अवधि होती है, जो अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फारेनहाइट) से अधिक होती है और ऐसे ही तापमान भारत के विभिन्न हिस्सों में है, खासकर अप्रैल से जून के गर्मियों के महीनों भारत के अधिकतर राज्य इसी तरह के हीटवेव से गुजरते हैं. जिसके कारण भारत के लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं. गर्मी में तापमान बढऩे के कारण ज्यादातर लोगों को कुछ ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जैसे- बहुत गर्मी लगना, पसीना निकलना, थकावट, हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और यहां तक कि यह सब से मौत भी हो सकती है. यह खासकर ऐसे लोगों को अपने चपेट में लेते हैं जो शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं जैसे बुजुर्ग, बच्चें और वैसे भी लोग जो पहले से ही किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. गर्मी से बचना है तो आपको खुद का ज्यादा से ज्यादा ख्याल रखना होगा और इसके लिए आपको पैसे भी खर्च करने होंगे. शहरीकरण, पेड़ों की कटाई और वायु प्रदूषण सहित विभिन्न पर्यावरणीय कारकों के कारण आजकल हीटवेव पहले की तुलना में ज्यादा से ज्यादा बढ़ा है. कंक्रीट संरचनाओं वाले शहरी क्षेत्र, सीमित हरित स्थान, और बढ़ी हुई गर्मी-अवशोषित सतहें “शहरी ताप द्वीप” प्रभाव का अनुभव कर सकती हैं, जिससे उच्च तापमान हो सकता है. तापमान और आर्द्रता में वृद्धि के कारण गर्मी के थकावट ज्यादा होती हैं, जिसके कारण डिहाइड्रेशन होने लगती है और सोडियम का लेवल भी शरीर में कम होने लगता है. मरीज़ आमतौर पर गर्मी के जोखिम के इतिहास के साथ-साथ कमजोरी, थकान और मुंह भी सुखने के लक्षण शामिल होते हैं. इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक की बढ़ती खपत के कारण, इन्फ्लूएंजा के मामलों में बढ़ रहे हैं. माहिम के पी.डी. हिंदुजा अस्पताल और एमआरसी के सलाहकार डॉ. किशोर साठे के मुताबिक
कौन और क्या सबसे ज्यादा प्रभावित करता है?
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के इंटरनल मेडिसिन डॉ. हनी सावला के मुताबिक ‘हीटवेव के कारण कई तरह कि दिक्कतें शरीर में शुरू हो जाती हैं जैसे-डिहाड्रेशन, शरीर में ऐंठन, बहुत ज्यादा थकावट, गर्मी का दौरा आदि शामिल हैं. डिहाइइड्रेश, कार्डियक अरेस्ट के कारण गुर्दे के भी गंभीर छती पहुंच सकती है. बुजुर्ग और छोटे बच्चे को हीटवेव में काफी ज्यादा थकावट होती है.शरीर पर हीट स्ट्रोक के लक्षण साफ दिखाई दे सकते हैं.
हीटवेव के दौरान क्या होता है?
हीटवेव के दौरान, शरीर में पानी और सोडियम की कमी होती है, जिससे दिमाग, किडनी, लिवर और मांसपेशियों में गंभीर चोट लग सकती है. जिन मरीजों को हीट स्ट्रोक हुआ है, वे अपने बॉडी टेंपरेचर से लेकर मलाशय के तापमान की जांच से गुजरते हैं.
हीटवेव में खुद की सुरक्षा कैसे करें
हीटवेव में एक चीज का ख्याल हमेशा रखना है वह यह कि शरीर को हमेशा ठंडा रखना है. ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, फल खाएं इससे आप पूरे दिन हाइड्रेट रहेंगे. गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचने के लिए, मौसम की चेतावनी जारी होने पर घर के अंदर रहने, ढीले सूती कपड़े पहनने और बाहर निकलते समय छाता या धूप का चश्मा पहनने की सलाह दी जाती है. हाइड्रेटेड रहने के लिए सोडियम युक्त तरल पदार्थों का सेवन करें.
नोट:-इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

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