रायगढ़ । शासन- प्रशासन के तमाम नियम कानूनों को ताक पर रखकर ठेकेदार व सरकारी नुमाइंदों के द्वारा संगठित तौर पर अंधाधुंध तरीके से काम करने और स्वहित में खुलकर ऐसे कारनामों को अंजाम देते नजर आते हैं, जो अप्रत्याशित और कभी कभी दूसरों के लिए खतरनाक भी हो सकता है।

रायगढ़ जिले के छाल में एक ऐसा ही बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक स्कूल परिसर के भीतर अवैध तरीके से सैकड़ों टन फ्लाई ऐश डंप कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि रायगढ़ क्षेत्र के किसी ठेकेदार के द्वारा इस तरह के काम को अंजाम दिया गया है। इस मामले में मीडिया के हस्तक्षेप के बाद ठेकेदार के कर्मचारी व स्कूल के प्राचार्य द्वारा पूरा ठीकरा सरपंच के सर पर फोड़ते हुए अपनी सफाई प्रस्तुत की गई है। आश्चर्यजनक रूप से इस मामले में ठेकेदार के दावों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी के बयान एक दूसरे के बिलकुल उलट हैं। यह बताता है कि ठेकेदार के द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने ढंग से इस अवैध काम को अंजाम दिया गया है।

यह पूरा मामला धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र के छाल गांव के हायर सेकंडरी स्कूल का है, जहां स्कूल परिसर के भीतर कई एकड़ जमीन पर अवैध रूप से फ्लाई ऐश डाल दिया गया है। इस मामले में स्कूल के प्राचार्य लोचन राठिया प्राचार्य ने कहा कि स्कूल परिसर में स्थित गड्ढों को पाटने के लिए सरपंच के देख-रेख में चार पांच डम्फर डस्ट गिराने को कहा गया था। सैकड़ों टन फ्लाई ऐश डंप किये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ज्यादा मात्रा में गिराने से पीछे नाला है, जिसमे बह कर जाएगा और किसान के खेत को बर्बाद करेगा, शाम को जाकर देख कर सरपंच को मना कर रहा हूँ।

इस मामले में संबंधित ठेकेदार के देखरेख में काम कर रहे ठेकेदार के अधीनस्थ कर्मचारी अपना अलग राग अलाप रहे हैं। उनका कहना है कि इस काम कर लिए प्रशासन से अनुमति ली गई है। हालांकि उन्होंने संबंधित अनुमति की कॉपी साझा नहीं किया। वहीं ठेकेदार के इस कथित परमिशन वाली बात के विपरीत इस मामले में धरमजयगढ़ एसडीएम डिगेश पटेल ने बताया कि छाल में डंप करने का कोई परमिशन नही है। उन्होंने कहा अगर ऐसा हो रहा है तो गलत है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामले में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 1500 रुपये प्रति टन पेनाल्टी का प्रवधान है। अब इस मामले में सवाल है कि 4-5 डम्फर की जगह सैकड़ों टन फ्लाई ऐश को स्कूल परिसर में डाला जाता रहा और जिम्मेदार आंख मूंदे क्यों बैठे रहे? क्या इस पूरे अवैध कारनामे के पीछे क्या कुछ लोगों का व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध हुआ है? यह जांच का विषय है। बहरहाल देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला आने के बाद इस अवैध कार्य में संलिप्त जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कितनी जल्दी और क्या कार्रवाई की जाती है।

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