• चन्द्रभूषण वर्मा
    चुनाव नजदीक आते ही अफसरों एवं उच्च अधिकारियों का राजनीति में उतरने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसमें भी कुछ सेवानिवृत्त होते हैं और कुछ राजनीति में शामिल होने के लिए सेवानिवृत्ति लेते हैं। वैसे किसी प्रशासनिक पोस्ट पर रहकर आम जनता की समस्याओं को सुलझाना और जनता के बीच जाकर समस्याओं को सुलझाना दोनों ही महत्वपूर्ण होता है। इसलिए यदि कोई अधिकारी, अफसर या फिर सरकारी बाबू अपनी सेवा से निवृत्त होकर जनता की सेवा के लिए तत्पर रहना चाहता है, तो वह सीधे चुनाव लडऩा ही चाहेगा। ये बातें इसलिए हो रही है कि छत्तीसगढ़ के 2008 बैच के आईएएस नीलकंठ टेकाम ने वीआरएस दे दिया है, ऐसी खबरें लगातार सामने आ रही हैं। उनके वीआरएस की खबरें सामने आने के बाद अब सीधे उनका राजनीति में सक्रिय रहने की चर्चाओं को बल मिल रहा है। खबरों में यहां तक कहा जा रहा है कि वे केशकाल, कोंडागांव या फिर अंतागढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं। एक बात और अभी छत्तीसगढ़ में विधानसभा को लगभग 5 से 6 महीने बाकी है, ऐसे में नीलकंठ टेकाम का वीआरएस लेना तो इसी होकर इशारा करता है।
    तो चलिए नीलकंठ टेकाम के बारे में आपको कुछ और जानकारी दे देते हैं। नीलकंठ टेकाम 2008 बैच के आईएएस हैं। बस्तर में कांकेर जिले के अंतागढ़ सरईपारा नीलकंठ टेकाम का मूल निवास है। यहीं उनकी स्कूली शिक्षा भी हुई है और महाविद्यालयीन शिक्षा उन्होंने कांकेर जिले में छत्तीसगढ़ शासकीय गवर्मेंट कॉलेज से ली है। यहां 1990 के दशक में टेकाम ने समाजशास्त्र से एमए किया है और यहां कुशल नेतृत्व के चलते छात्रसंघ के अध्यक्ष भी चुने गए थे। साल 1994 में उन्होंने एमपी पीएससी क्रेक किया और एसटी वर्ग में टॉपर रहे। उनकी ज्यादातर पोस्टिंग बस्तर संभाग में ही रही। जगदलपुर में करीब 6 साल एसडीएम से लेकर अपर कलेक्टर रहे और जगदलपुर में नगर निगम कमिश्नर की जिम्मेदारी भी सम्भाल चुके हैं। साल 2008 में उन्हें आईएएस अवॉर्ड किया गया। वे दंतेवाड़ा जिला के जिला पंचायत सीईओ भी रहे हैं और कोंडागांव कलेक्टर रहते हुए उन्होंने नीति आयोग के आकांक्षी जिलों में कोंडागांव को नंबर वन बनाया है। इस समय टेकाम संचालक कोष एवं लेखा विभाग की जिम्मेदारी सम्भाल रहे हैं। उनके रिटायरमेंट का समय साल 2028 तक है। बताया जा रहा है कि छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के बाद नीलकंठ टेकाम की इच्छा शुरू से ही राजनीति में आने की थी। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय उन्होंने चुनाव लडऩे के लिए इस्तीफा दे दिया था तब वे बड़वानी जिले में एसडीएम के पद पर कार्यरत थे।
    श्री टेकाम का यदि वीआरएस स्वीकृत हो जाता है तो यह कोई नई बात नहीं होगी। क्योंकि इससे पहले छत्तीसगढ़ के 2005 बैच के आईएएस रहे ओ.पी.चौधरी ने भी अपना इस्तीफा सौंपकर 2018 में भाजपा से खरसिया विधानसभा सीट पर अपनी किस्मत आजमाई थी। लेकिन सत्ता परिवर्तन की लहर के चलते वे चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद श्री चौधरी लगातार बीजेपी में सक्रिय हैं और उम्मीद है कि भाजपा आने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें ही टिकट देगी।
    खैर, अभी तक चर्चाओं में आईएएस नीलकंठ टेकाम के बीजेपी ज्वाइन करने की खबरें ही चल रही हैं। लेकिन अब ये तो वक्त बताएगा कि श्री टेकाम किस पार्टी के बैनरतले अपनी राजनीतक पारी शुरू करेंगे।
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