संवाद के लिए लोकतंत्र में यह कैसा दृश्य_ मुंह में काली पट्टी, गर्दन में लटके ताले, दंडवत प्रणाम और घुटनों के बल चलते कर्मचारी

प्रियंका गांधी के लिए गुलाब का फूल, हम घुटने के बल चलने को मजबूर-महिला संविदाकर्मी

रायपुर. लोकतंत्र की सबसे प्राथमिक इकाई है कि सरकार और जनता के बीच संवाद स्थापित हो। यही खूबी लोकतंत्र को और भी खूबसूरत बनाती है। किंतु यह कैसी विडम्बना है! शासन के अभिन्न अंग और उनकी योजनाओं को धरातल पर लागू करने वाले महिला संविदा कर्मचारियों को घुटनों के बल चलकर सरकार से बातचीत करने अपील करनी पड़ रही है। महिला संविदा कर्मियों ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि प्रियंका गांधी के लिए सड़कों पर गुलाब के फूल बिछाकर स्वागत किया गया और हकीकत ये है कि हम घुटने के बल चलकर संवाद करने की अपील कर रहे है फिर भी हमारी बात नहीं सुनी जा रही। वहीं कड़कड़ाती धूप में दिव्यांग भी शामिल होकर अपील की । पुरुषों ने दंडवत प्रदर्शन कर अनोखे प्रदर्शन किए। बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी अपनों बच्चों के साथ एवं दिव्यांग जन भी शामिल हुए। 24 दिनों से हड़ताल पर बैठे संविदा कर्मचारियों को मंगलवार को शासन ने 3 दिवस में कार्यालय ज्वाइन करने का अल्टीमेटम दे दिया है, वहीं प्रदेश भर के संविदाकर्मी मुंह में काली पट्टी , गर्दन में लटके ताले, दंडवत प्रणाम एवं घुटनों के बल चलकर सरकार के नियमितिकरण के वादे के संबंध में संवाद स्थापित करने तूता धरना स्थल से मंत्रालय की ओर रैली निकालकर प्रदर्शन किए। पुलिस ने इन्हें बैरीगेट्स लगाकर रोक दिया। छत्तीसगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ के प्रांताध्यक्ष कौशलेश तिवारी ने कहा कि सरकार की संवादहीनता के चलते हमारी माताओं बहनों को घुटने के बल चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हम विगत 24 दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से हड़ताल पर हैं । स्वस्थ लोकतंत्र में संवाद स्थापित होना चाहिए किंतु पौने पांच साल बाद भी सरकार अपना वादे के संबंध में बात नहीं करना चाहती ।अपितु दमनपूर्वक हड़ताल तोड़वाना चाहती है। यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

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