Author: NEWSDESK

रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से आज यहां राजभवन में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक श्री अरविंद नेताम ने भेंट की। साथ ही राज्यपाल को…

रायपुर। अपने डे टू डे लाइफ को एंजाय कैसे किया जाये इस विषय पर मोटिवेशनल स्पीकर एसएसएस संतोष वर्मा का एक सेशन का आयोजन बलौदाबाजार में…

अमलेश्वर (पाटन)। कल रविवार 18 जुलाई को प्रात: 9 बजे से शिवपार्क कॉलोनी अमलेश्वर (भोथली ) शिव मंदिर परिसर में कॉलोनी वासियों की महत्वपूर्ण बैठक आहूत…

रायपुर। हांडीपारा स्थित छत्तीसगढ़ी भवन में आज दिनांक 17 जुलाई को छत्तीसगढ़ी संयुक्त किसान मोर्चा प्रदेश समिति की बैठक दोपहर 03 बजे संपन्न हुई।बैठक की अध्यक्षता…

जशपुरनगर। जशपुर जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से संबंल  बनाने के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से विभिन्न योजनाओं से जोड़कर लाभांवित किया जा रहा है। साथ ही नवाचार के माध्यम से भी उनके आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।इसी कड़ी में बगीचा तहसील की मां खुडिया रानी महिला कृषक उत्पादक संगठन ने वैल्यू चेन मार्केटिंग के तहत्  कार्य प्रारंभ किया है। जिससे उन्होंने सना कल्स्टर से अपने जिले में अधिक मात्रा में होने वाले फल नाषपाती को दूसरे जिले सहित अन्य राज्यों को उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रहें हैं। उनके द्वारा 27 क्विंटल नाशपाती की खरीदी सन्ना के कृषकों से कर उसे पड़ोसी जिला रायगढ़ में विक्रय किया गया है। मां खुड़िया रानी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने कहा कि  जशपुर  जिले  में वन सम्पदा की कोई कमी नहीं है। वह इससे भी अपनी आमदनी को बढ़ाने का प्रयास कर रहें है। जिसके लिए उन्होंने नाशपाती फल को जिले के बाहर सप्लाई कर इसकी शुरूआत की है। उन्होंने बताया कि उन्हें पहली शुरूआत में ही 7,500 रुपए की आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। जिससे समूह की महिलाओं में काफी प्रसंन्नता व्याप्त है। वह इस कार्य को आगे बड़े पैमाने पर करने की तैयारी कर रही है जिससे उन्हें अत्यधिक राशि का लाभ हो सके।उल्लेखनीय है कि जषपुर जिले में नाशपाती की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। जिले के बगीचा-सन्ना क्षेत्र के किसान इसकी खेती अधिक मात्रा में करते है। किसानों ने दीर्घवर्ती फसल का लाभ लेते हुए नाशपाती अपने खेतों में लगाया है। जिससे उन्हें प्रति वर्ष अच्छा मुनाफा हो जाता है। अब इसका लाभ जिले की महिला स्व-सहायता समूह भी उठाने लगी है। इससे उनके आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी साथ ही जिले में हो रहे नाशपाती दूसरे जिले व अन्य राज्यों में भी उपलब्ध होगी।

मशरूम उत्पादन से मिलेगी आमदनी के नये मौके कोण्डागांव। स्वाद मे जायकेदार होने के अलावा मशरूम अपने स्वास्थ्य वर्धक गुणो के कारण भारतीय खान-पान मे अलग…

धमतरी। मछलीपालक दोस्तों के साथ उठते बैठते कृषक श्री सुकमन मरकाम के मन में भी यह बात उपजी कि अगर उनके पास भी एक निजी तालाब हो तो मछलीपालन के जरिए अपनी आमदनी में चार चांद लगा सकते हैं। गांव के ज्यादातर किसानों की भांति श्री सुकमन भी मानसून आधारित खेती करते हैं। सिंचाई का समुचित साधन नहीं होने से बरसात के बाद कोई और फसल लेने की गुंजाइश ही नहीं थी। इसी बीच अपने साथियों से वे मछलीपालन से कम समय में होने वाली कमाई के बारे में सुन उनके मन में भी मछलीपालन की इच्छा बलवती हुई।जिले के नगरी विकासखंड के सरईटोला (मा.) ग्राम पंचायत के आश्रित गांव गट्टासिल्ली (रै.) के किसान श्री सुकमन मरकाम के इस सपने को मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) ने पूरा कर दिया है। उन्होंने मछलीपालन के लिए अपनी निजी जमीन पर तालाब की मांग ग्राम पंचायत से साझा की। ग्राम पंचायत की पहल से मनरेगा से उनके लिए तीन लाख रूपए की लागत से निजी तालाब के निर्माण का कार्य स्वीकृत हो गया। इसके बाद पिछले साल नवम्बर में तालाब की खुदाई शुरू हुई और इस वर्ष मई में इसका काम पूरा हो गया। तालाब खुदाई के दौरान गांव के 76 श्रमिकों को कुल 1424 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ, जिसके लिए उन्हें दो लाख 71 हजार रूपए का मजदूरी भुगतान किया गया। श्री सुकमन मरकाम के परिवार को भी इस काम में 54 मानव दिवस का सीधा रोजगार मिला, जिसके एवज में उन्हें दस हजार 260 रूपए की मजदूरी मिली।मनरेगा से श्री सुकमन मरकाम के खेत में 30 मीटर लंबाई और इतनी ही चौड़ाई का तालाब खोदा गया है। वे बताते हैं कि आसपास के जलस्रोतों और बारिश के पानी से तालाब भर गया है। उन्होंने इसमें सात किलो मछली बीज (स्पॉन) डाला है। कुछ महीने बाद बाजार में बेचने लायक मछलियां तैयार हो जाएंगी और इसके साथ ही श्री सुकमन मरकाम का सपना भी साकार हो जाएगा। तालाब के पानी से अल्पवर्षा की स्थिति में वे अपने खेतों की सिंचाई भी कर सकेंगे। मनरेगा से निर्मित यह तालाब श्री सुकमन मरकाम को आजीविका के लिए मछलीपालन का मजबूत विकल्प देने के साथ ही सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराकर उनके फसलों की पैदावार भी बढ़ाएगा। इससे न सिर्फ उनकी कमाई बढ़ेगी, बल्कि परिवार की आर्थिक समृद्धि का रास्ता भी खुलेगा।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ अवसर पर या मांगलिक क्यों के आयोजन के उपरांत किन्नरों को दान देने की प्रथा है. ऐसा माना जाता है…

महासमुन्द। छत्तीसगढ़ राज्य के अधिकतर क्षेत्रों में वर्तमान में छिटका (ब्राड कास्टिग) पद्धति के माध्यम से धान की बुआई की जाती है। इस परम्परागत पद्धति से…

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