चाणक्य नीति कहती है कि ज्ञान और शिक्षा के बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती है. व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति के लिए अपनी कीमती वस्तु का त्याग भी करना पड़े तो तैयार रहना चाहिए. चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति ज्ञान और शिक्षा के महत्व को समझता है, उसके लिए कोई लक्ष्य नामुमकिन नहीं है. ऐसे लोग बढ़ी ही सहजता से सफलता प्राप्त करते हैं. वहीं जिसके पास ज्ञान है, उसके लिए सीमाओं का भी बंधन नहीं रहता है. ज्ञानी व्यक्ति को हर स्थान पर सम्मान प्राप्त होता है. चाणक्य स्वयं एक योग्य शिक्षक थे. इसलिए वे ज्ञान के महत्व को अच्छे ढंग से जानते और समझते थे. उनका मानना था कि ज्ञान की देवी सरस्वती जी का आशीर्वाद मिलने से जीवन का अंधकार मिट जाता है. ज्ञान ही व्यक्ति को अच्छे और बुरे का भेद बताता है. ज्ञान में जीवन की सार्थकता निहित है. जो व्यक्ति ज्ञान को प्राप्त करने से बचता है, उसके जीवन में बाधा, परेशानी और संकट बने ही रहते हैं. ऐसे लोग जीवन भर संघर्ष करते हैं और छोटी छोटी चीजों को भी प्राप्त करने में परेशानियों का सामना करते हैं. चाणक्य के अनुसार युवाओं को शिक्षा ग्रहण करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए. शिक्षा युवाओं के लिए ऐसा माध्यम है, जिसके सहारे वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं. चाणक्य की इन बातों पर युवाओं को ध्यान देना चाहिए-
अनुशासन- चाणक्य के अनुसार अनुशासन से ही सफलता मिलती है. शिक्षा को ग्रहण करने में अनुशासन का पालन करना चाहिए. कठोर अनुशासन से ही मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आलस करने वालों को शिक्षा ग्रहण करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
बुरी संगत का त्याग करें-चाणक्य के अनुसार युवाओं को बुरी संगत से दूर रहना चाहिए. बुरी संगत शिक्षा में बाधा हैं. शिक्षा के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए.
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