हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्त्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्योतिष क्षेत्र में ख्याति प्राप्त जवाली के ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा ने बताया कि इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व छह सितंबर और सात सितंबर के दिन मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर तीन अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है, जिसमें पूजा-पाठ का विशेष महत्त्व है।

छह सितंबर के दिन तीन अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन हर्षण योग रात्रि 10:26 बजे तक रहेगा। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन और रवि योग सुबह 06:01 बजे से सुबह 09:20 बजे तक रहेगा। पंडित विपन शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण का जन्म बुधवार के दिन हुआ था तथा इस बार संयोगवश श्रीकृष्ण का जन्म बुधवार को होगा जो कि काफी शुभ माना जा रहा है। एचडीएम

इन राशि वालों की चमकेगी किस्मत – मकर राशि। इस राशि वालों को कृष्ण जन्माष्टमी विशेष लाभकारी साबित हो सकती है क्योंकि शनि देव आपकी राशि से धन भाव में गोचर कर रहे हैं। इसलिए इस अवधि में आपको आकस्मिक धन की प्राप्ति हो सकती है। वहीं व्यापारियों को इस समय फंसा या उधार दिया हुआ धन मिल सकता है। वहीं जो नौकरपेशा लोग हैं, उनको इस अवधि में प्रमोशन और इन्क्रीमेंट मिल सकती है। सिंह राशि। तीस साल बाद विशेष योग का बनना सिंह राशि के जातकों को हर क्षेत्र में शुभ सिद्ध हो सकता है। इस समय आपके आजीविका के संसाधनों में वृद्धि हो सकती है। साथ ही इस समय आपकी आय में इजाफा भी होगा। वहीं जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा। रुके हुए काम बनेंगे। कोई मजबूत निर्णय लेंगे जो कि सफल साबित होंगे। वहीं इस समय आपको पार्टनरशिप के काम में लाभ मिल सकता है। वृष राशि। वृष राशि जन्माष्टमी विशेष लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इस समय आपको आकस्मिक धन की प्राप्ति हो सकती है। आपका खुद का बिजनेस है तो आय बढ़ेगी। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उनको इस समय किसी परीक्षा में सफलता मिल सकती है। वहीं आप लोगों को इस समय किस्मत का भी साथ मिलेगा।

शुभ मुहूर्त – वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि छह सितंबर दोपहर तीन बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और सात सितंबर दोपहर चार बजकर 14 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व स्मार्त संप्रदाय के अनुयायियों द्वारा छह सितंबर, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। वहीं वैष्णव संप्रदाय के लोग यह पर्व सात सितंबर गुरुवार के दिन मनाएंगे। इस दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 09:20 बजे से प्रारंभ होकर सात सितंबर सुबह 10:25 बजे तक रहेगा।

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