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रायपुर। केसला निवासी हितेंद्र देवांगन ने फिर एक बार अपनी विशेष कलाप्रतिभा मूर्ति कला के माध्यम से प्रदर्शित की है। जिसमें उन्होंने आदियोगी शंकर की ध्यान मग्न अवस्था को अपनी मूर्तिकला के माध्यम से विशालकाय मूर्ति का स्वरूप दिया है। यह मूर्ति खरोरा नगर व आसपास के क्षेत्र में स्थापित अब तक की सबसे विशालकाय मूर्ति है, जो अपने आप में अनोखा रिकॉर्ड बना चुकी हैं। इतनी विशाल प्रतिमा वहां के स्थानीय निवासियों के लिए अकल्पनीय हैं।

इस विशालकाय मूर्ति के नीचे ही गणेश पंडाल में प्रवेश व निकासी द्वार को बनाया गया है। यह मूर्ति बहुत ही कम समय में और सुनियोजित ढंग से तैयार की गई है। यह मूर्ति सिद्धिविनायक ग्रुप द्वारा निर्धारित गणेश पंडाल के स्वागत द्वार पर स्थापित किया गया है, यह मूर्तियुक्त अनोखा पंडाल लोगों को दूर से ही आकर्षित कर रहा है। आर्टिस्ट के अनुसार इस मूर्ति को बनाने हेतु सिद्धिविनायक ग्रुप के सदस्य भूपेंद्र देवांगन, मृदुल अग्रवाल, अभिलाष अग्रवाल, राम साहू, विजय देवांगन व चिराग अग्रवाल द्वारा सुझाव व दिशा निर्देश दिया गया, जिसमें भूपेंद्र देवांगन का विशेष सहयोग मिला। पंडाल के अंदर भी विशाल व भव्य गणेश प्रतिमा स्थापित है।
20 दिन से 40 फीट तक का सफर
यह मूर्ति प्लास्टर, बास, बोरी, पैरा व पेपर के अनोखे मिश्रण से तैयार किया गया है। यह अनोखी और नई तकनीक आर्टिस्ट हितेंद्र द्वारा अपनाई गई है, जो मूर्ति के वजन को काफी कम कर देती है। यह तकनीक आर्टिस्ट हितेंद्र ने स्वयं के विशेष अनुभव द्वारा निजात की है।
प्रकृति का प्रकोप और शिव बाबा की मदद :


आर्टिस्ट हितेंद्र द्वारा इस मूर्ति बनाने के सफर में मिले विशेष अनुभवों को साझा करते हुए कहा की यह सत्य है, जो मैंने अनुभव किया ” सत्य की नाव हिलती डुलती जरूर है, लेकिन डूबती नहीं या फिर यूं कहें कि उसका क्या करें आंधी और तूफान जिसका साथी है भगवान “। इस मूर्ति को बनाने में भी प्रकृति द्वारा बहुत परीक्षा ली गई, साथ ही इस मूर्ति के ऊंचाई ने इसे और भी जटिल बना दिया था। हर दिन एक नए चैलेंज लेकर सामने आता था, अभी किसी रूप में तो कभी रूप में दूसरे रूप में इसी बीच में उन्हें शिव बाबा का विशेष सहयोग शक्ति व प्रेरणा मिलती थी, जब भी कोई मुश्किल आती शिव बाबा उन्हें मदद करते थे। रोज सुबह परमात्मा शिव से शक्ति व वरदान राजयोग की ध्यान विधि द्वारा अनुभव करते थे। हितेंद्र के अनुसार उन्होंने यह राजयोग ध्यान प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के रायपुर व खरोरा सेंटर से शिक्षा प्राप्त की है, जिसका वह अपनी कला कुशलता में भरपूर उपयोग करते हुए भगवान की मदद लेते हैं।

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