रायपुर। छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी महासंघ, द्वारा अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ की दिनांक 6 सितंबर को 27 राज्य के प्रांताध्यक्षो की आनलाइन बैठक में शामिल होकर निर्णय लिया गया है कि दिनांक 29 सितंबर मंगलवार को जिला स्तरीय प्रदर्शन कर विरोध दिवस मनाया जाएगा । मुख्यमंत्री के नाम एवं प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रदर्शन कार्यालयों में तख्ती, मांगों का पोस्टर तैयार कर किया जाएगा। भोजनावकाश में प्रदर्शन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष राकेश साहू ने साथी कर्मचारियों से आव्हान करते हुए कहा कि हर कोई जानता है कि पूरा देश युद्ध स्तर पर कोविड -19 महामारी से लड़ रहा है। तदनुसार, आवश्यक सेवाओं में काम करने वाले सभी कर्मचारी इस ख़तरनाक बीमारी से लडऩे के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। लगभग सभी राज्यों में स्थिति कमजोर है, कर्मचारी साथियों से अपील है कि वे राज्य सरकार के साथ सहयोग करें और महामारी के खिलाफ लड़ाई में अधिकतम स्तर का योगदान दें। केन्द्र सरकार ने एक जनवरी 2020 से बढ़े हुए व 2021 तक महंगाई भत्ते पर रोक लगाने का परिपत्र जारी कर दिया। इसके अलावा कुछ राज्यों ने वेतन में कटौती की हैं, वेतन वृद्धि पर, कुछ ने अर्जित अवकाश के नगदीकरण पर रोक लगा दी। सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा सहित आवश्यक सेवाओं में अधिकांश पद खाली पड़े हैं। सरकार ने वित्तीय कठिनाइयों के आधार पर सम्बंधित अधिकारियों को रिक्त पदों को रोके रखा है। केन्द्र सरकार द्वारा पूंजीपतियों के पक्ष में श्रम कानूनों में संशोधन करने निर्णय लिया है। श्रम कानूनों में संशोधन और कृषि बिल में संशोधन, बहुराष्ट्रीय निगमों और कॉर्पोरेट निकायों के पक्ष में लिए गए नीति को दर्शाता है। बीस लाख करोड़ के बेलआउट पैकेज की घोषणा केंद्र सरकार का रवैया नवउदारीकरण की नीतियों के पक्ष में साफ दिखाई देता है। वास्तव में बिजली, आयुध कारखाने व कोयले सहित सभी सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण के रोडमैप के अलावा कुछ नहीं है इसके अलावा यह कृषि में कॉर्पोरेट खेती को भी बढ़ावा देता है। कुछ राज्यों में बहुत सारी शिकायतें हैं कि पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। पीपीई किट की कमी पर कम ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां तक वेंटिलेटर की खरीदारी पर भी भ्रष्टाचार की बू आ रही है जिसका खुलासा अखबार में भी हुआ है, आक्सीजन सिलेंडर की अनापुर्ति, जीवन रक्षक दवाओं की जमाखोरी, कालाबाजारी, अस्पताल में बेड की कमी, वर्तमान समय में चाहे राज्य हो या पूरे देश की बात हो आम नागरिकों के लिए भयावह स्थिति का संकेत है। आवश्यक सामग्री संग्रह पर नियंत्रण संबंधी रोक हटा दी गई है, इससे जमाखोरी और कालाबाजारी को छुट मिल गया है। 50 लाख का बीमा का लाभ उन सभी प्रकार कर्मचारियों को दी जाए जो रोकथाम में ड्यूटी कर रहे हैं। अल्प मानदेयी कर्मचारियों को जोखिम भत्ता दिया जाए। यदि राज्य सरकारें इतनी ईमानदार है, तो वे बढ़े हुए डीए को त्रक्कस्न में विलय कर सकती हैं। पुरानी पेंशन योजना बहाल कर एक बड़ी धनराशि रोक सकती है। क्योंकि प्रति माह सरकार एक बड़ी धनराशि फंड में जमा करती है। ऐसी परिस्थितियों केंद्र व राज्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ 29 सितंबर को विरोध दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। सभी साथियों से अनुरोध है कि वे जिला मुख्यालय, कार्यालयों में दोपहर के भोजन अवकाश के समय प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। हमने अपने महान लीडर कामरेड नरेंद्र सिंह चन्द्राकर को खोया है। उनके अरमानों को मंजिल तक पहुंचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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