राजनांदगांव। कांग्रेस नेता आफताब आलम ने कहा कि किसानों की आड़ में केंद्र सरकार ने कृषि संबंधी बिल का नाम देकर जो बिल प्रस्तुत किया है, वह पूर्ण रूप से औद्योगिक जगत एवं कंपनियों के लिए है। श्री आलम ने कहा कि प्रथम बिल आवश्यक वस्तु अधिनियम से सीधा स्टॉकिस्ट को लाभ देने वाला है। इससे किसानों को कोई लाभ नही मिलेगा। दूसरा बिल कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य इससे सीध फायदा कंपनियों को होगा। इस बिल के लाभ के दायरे में दूर-दूर तक किसान नहीं आएगें। तीसरा बिल कृषक कीमत आश्वासन के लागू होते ही ट्रेडिंग जोन का निर्माण एवं बढ़ावा देने वाला है। उन्होंने कहा कि सबसे घातक बात यह है कि कृषक मंडी व्यवस्था नगण्य हो जाएंगी अर्थात वर्तमान में संचालित सरकारी मंडिया बंद हो जाएंगी, जो कि कई असुविधाओं के बाद भी वह किसानों के लिए एक छत की तरह है। व्यवस्थागत खामियों के बाद भी किसानों के ऊपर कम से कम छत तो थी, जिसे केंद्र सरकार ने पूरी तरह से हटा दिया है। साथ ही समर्थन मूल्य भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद यह तय है कि देश का किसान बड़े व्यापारी एवं उद्योगपतियों के सामने नतमस्तक रहने विवश हो जाएगा। श्री आलम ने कहा कि आजादी के बाद देश में पहली बार सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से कंपनियों एव उद्योगपतियों को लाया जा रहा है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था उद्योगपतियों का कर्ज माफ और उन्हें लाभान्वित करने से इतनी लचर हो गई कि अब कंपनियों को केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में निवेश करने आमंत्रित कर रही है। क्योंकि सारा पैसा पहले ही सरकार उद्योगपतियों पर खर्च कर चुकी है। सरकार के पास किसानों के लिए पैसा नहीं बचा है। यह विदित हो कि आज जब देश की जीडीपी माईनेस 23 प्रतिशत नीचे चली गई है, ऐसे समय भी देश के कृषि क्षेत्र एक से 2 प्रतिशत तथा छत्तीसगढ़ में चार प्रतिशत जीडीपी में बढ़ोत्तरी बनाए हुए है। श्री आलम ने कहा कि बात-बात पर राष्ट्रवाद का दंभ भरने वाली भाजपा का जो राष्ट्रीय व्यवसाय कृषि के प्रति नकारात्मक रवैय्या है, वह अत्यंत ही दुखद है तथा यह बिल अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियों का स्मरण कराता है।

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