रायपुर। लाकडाउन के दौरान खलिहानों में तोड़-फोड़ का शिकार हुए परसदा गांव के किसान आज राजधानी रायपुर पहुंचे। उन्होंने प्रदेश के कृषि मंत्री, नगरीय निकाय मंत्री और दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि खेतों में फसल पकने को तैयार खड़ी है। कुछ ही दिनों मे फसल काटकर खलिहान में लाना है। लेकिन अचानक उनके पचासों वर्ष पुराने खलिहानों को बिना नोटिस के तोड़ दिया गया। ऐसे में उनके सामने फसल रखने और मिंजाई आदि करने की समस्या खड़ी हो गई है। वे लोग भारी तनाव मे हैं। उनकी मांग है कि खलिहानों को तत्काल पूर्व स्वरूप में लाया जाए ताकि वे अपनी किसानी का काम सुचारू रूप से कर सकें। किसानों ने कहा है कि इस विषय पर वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे। गौरतलब है कि पिछले दिनों कुम्हारी पालिका के अंतर्गत आने वाले ग्राम परसदा में किसानों के खलिहान तोड़ दिये गए थे। किसानों का कहना है कि वे लोग पचासों वर्ष से इस पर मिंजाई कर रहे हैं और फसल रख रहे हैं। ऐसे में लाकडाउन के दौरान जब सभी सरकारी आफिस और काम बंद थे तभी अचानक हमारे ब्यारे(खलिहान) तोड़े गये। इसके लिये कोई पूर्व सूचना भी नही दी गई। हम लोगों ने विरोध किया तो पुलिस बल का प्रयोग कर तोड़-फोड़ को अंजाम दिया गया। यह सब काम गौठान बनाने के नाम पर किया गया जबकि हमारे गाँव मे पहले से ही पूर्वजों का बनाया हुआ गोठान है। पालिका ने उसमे काफी खर्च भी किया है। भूमिपूजन भी किया है। अब अचानक गांव की दूसरी तरफ किसानों का ब्यारा (खलिहान) छीनकर गौठान बनाने का कोई औचित्य नही है। वो भी तब जबकि किसानों की फसल पकने को तैयार खड़ी है। गांव के किसान कई पीढिय़ों से वहां फसल रख रहे हैं। उनका कहना है कि हमारी फसल पकने की स्थिति में है। ऐसे में हम कहां जाएंगे? धान-पान का काम कैसे करेंगे। इसी बात को लेकर उन्होंने मंत्रियो को जापन सौंपा है। साथ ही किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री हमारे विधायक हैं और वे स्वयं हमारे ब्यारे को शुरू से देखते चले आ रहे हैं। मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की है कि गोठान के लिये अनावश्यक तोड़-फोड़ नही की जाएगी। ऐसे में पालिका द्वारा की गई तोडफ़ोड़ पूरी तरह नाजायज है। वे अपने खलिहानों की गोहार लगाने के लिये शीघ्र ही मुख्यमंत्री जी से मिलेंगे।
खलिहानों में तोडफ़ोड़ से परेशान परसदा के किसान पहुंचे मंत्रियों के पास, सीएम से गुहार लगाने की तैयारी
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