हिमाचल प्रदेश के किसान अपने खेत खलियानों में औषधीय गुणों के भंडार अश्वगंधा की खेती करेंगे। राष्ट्रीय मेडिसिन प्लांट बोर्ड के अभियान के तहत राज्य मेडिसिन प्लांट बोर्ड अब तक एक लाख 10 हजार से अधिक पौधे वितरित कर चुका है। प्रदेश के लोगों को औषधीय गुणों से भरपूर अश्वगंधा के गुणों से अवगत करवाने के साथ ही इसकी खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार किसानों और बागबानों को घर द्वार पर पौधे उपलब्ध करवा रही है। प्रदेश के दस जिलों में अश्वगंधा के पौधों का वितरण किया गया है।

हिमाचल प्रदेश के चार हर्बल गार्डन में से तीन हर्बल गार्डन ने अश्वगंधा के पौधों को उगाया है। अश्वगंधा की पौध किसानों तक पहुंचाने के साथ ही इसके लाभों की जानकारी ाी उपलब्ध करवाई जा रही है। यह पौधा आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका बदलने में मददगार साबित हो सकता है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में चार हर्बल गार्डन हैं, जिनमें नेरी हर्बल गार्डन हमीरपुर, बिलासपुर जिला का जंगल झलेड़ा हर्बल गार्डन, मंडी का जोगिंद्रनगर हर्बल गार्डन तथा रोहड़ू हर्बल गार्ड शामिल हैं। रोहडू हर्बल गार्डन को छोडक़र अन्य सभी से अश्वगंधा के पौधे उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। आयुष विभाग के माध्यम से दो लाख पौधे किसानों को उपलब्ध करवाने को लक्ष्य रखा गया है। अगस्त 2025 तक इस टारगेट को अचीव किया जाएगा। इसके लिए भरसक प्रयत्न किए जा रहे हैं। -एचडीएम

ये है अश्वगंधा के लाभ

तनाव कम करना, ऊर्जा बढ़ाना व शारीरिक शक्ति को बेहतर करने में इसका प्रयोग किया जाता है। अश्वगंधा कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद करता है जो तनाव हार्मोन है। अश्वगंधा में एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणली को मजबूत करने में मदद करते हैं।

राज्य मेडिसिन प्लांट बोर्ड की तरफ से प्रदेश के हर्बल गार्डन के माध्यम से किसानों को अश्वगंधा के पौधे उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। किसानों को दो लाख पौधे उपलब्ध करवाने का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक लगभग एक लाख 10  हजार पौधे उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। अगस्त २०२५ तक लक्ष्य प्राप्ति संभावित है
डा. कमल भारद्वाज, इंचार्ज, नेरी हर्बल गार्डन

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