महासमुंद। कोरोना वायरस को लेकर अफवाहों को ध्यान न दें, समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की लें सलाह। चीन के वुहान शहर से निकले कोरोना वायरस से फैली कोविड-19 की महामारी को लेकर अब तक प्रमाणिक तौर पर कोई निश्चित वैक्सीन या दवा इजाद नहीं हो सकी है। इस दिशा में वैज्ञानिकों के शोध आज भी जारी हैं। ऐसे में अन्य देशों या राज्यों की पारिस्थितिक विभिन्नताओं और दिग्भ्रमित करने वाली अफवाहों के चलते कई तरह की भ्रांतियां व्याप्त है। यही कारण है कि हम इससे बचने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद आपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हुई है। जिला स्वास्थ्य के चिकित्सकों ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों को सिरे से नकार दें कि ठंड का मौसम और बर्फ कोरोना वायरस के असर से खत्म हो जाएगा। सर्दी के मौसम में संक्रमण बढऩे की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। ऐसा भी कोई प्रमाण नहीं है कि गर्म और आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में कोरोना वायरस का संक्रमण नही होता। यहां ध्यान में रखना जरूरी है कि अल्ट्रावायलेट का उपयोग त्वचा को कीटाणु मुक्त बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, इससे त्वचा में जलन पैदा कर सकती है। दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग आमतौर पर सोशल मीडिया में वायरल होने वाले वीडियो देख कर यह यह समझ लेते हैं कि थर्मल स्कैनर कोविड पीडि़तों की पहचान कर लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि वे केवल ऐसे लोगों की पहचान कर सकते हैं जिन्हें बुखार है। इनसे कोरोना वायरस के संक्रमित व्यक्तियों का पता नहीं लगा सकते। उल्लेखनीय है कि एंटीबायोटिक्स इस वायरस के खिलाफ काम नहीं करते हैं। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया से हुए संक्रमण को दूर करते हैं। इसलिए कोविड-19 से संक्रमित होने पर चिकित्सक के परामर्श में पूर्ण उपचार लिया जाना जरूरी है। एक और महत्पूर्ण बात यह भी है कि अब तक इस बात के भी कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं कि कुत्ते, बिल्ली, गाय या बैल जैसे पालतू जानवरों से कोरोना वायरस का संक्रमण फैल सकता है। लेकिन इनके संपर्क में आने पर हाइजीन का ध्यान तो रखना ही चाहिए। वहीं यह भी जान लें कि अल्कोहल या क्लोरीन का छिड़काव उन वायरस को मारने में मदद नहीं करेगा जो शरीर के अंदर प्रवेश कर चुके हैं, क्योंकि सिर्फ ऊपर की सतहों को कीटाणुमुक्त रखने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आज तक कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने या इसके संक्रमण के इलाज के लिए कोई प्रामाणिक दवा उपलब्ध नहीं है। लेकिन इस बात में कोई दो-मत नहीं है कि गर्म पानी से स्नान करने पर कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आने बचाव होता है। वर्तमान में जिला स्तरीय हालातों के मद्देनजर हमें चाहिए कि हम स्वयं के साथ-साथ जन-स्वास्थ्य के हित में भी अनुकरणीय कदम उठाएं और कोविड-19 से बचाव के लिए एकजुट होकर प्रयास करें। जिसमें घर से बाहर निकलते समय हमेशा मास्क पहनें, समय-समय पर साबुन या हैंड रब सैनिटाइजर से हाथ साफ करते रहना, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हरी सब्जी, फल, सलाद, आयुर्वेदिक काढ़े जैसे गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें व सोशल डिस्टेनसिंग में रहने सहित सर्दी, खांसी, बुखार गले में खराश, उल्टी, छाती में दर्द, होठों का नीला पडऩा और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर कोविड-19 की त्वरित जांच कराना एवं धनात्मक आने की स्थिति में बिना संपर्क तोड पूर्ण उपचार लेना आदि शामिल हैं। ऐसा करने से ही हम कोरोना वायरस को फैलने व अपने लोगों को काविड-19 की बीमारी लगने से बचा सकते हैं।
कोरोना वायरस दूसरे वायरसों से अलग है, अंतर समझकर दूर करें भ्रांतियां
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