3 अगस्त को हर साल फ्रेंडशिप डे मनाया जा रहा है. लेकिन अब ये दिन केवल ग्रीटिंग या वॉट्सऐप मैसेज भेजने तक केवल सीमित नहीं रह गया है. लेकिन बदलते वक्त के साथ फ्रेंडशिप डे का मतलब भी बदल रहा है. अब दोस्ती को केवल सेलिब्रेट करने की नहीं, बल्कि उसे और गहराई से समझने और ठीक करने की जरूरत महसूस की जा रही है. इसी सोच के साथ जन्म हुआ है – ‘फ्रेंडशिप थेरेपी लेटर’ का. यह न सिर्फ दोस्ती को मजबूत करता है, बल्कि उसमें आई दरारों को भी भरने का एक इमोशनल जरिया बनता जा रहा है.

क्या है फ्रेंडशिप थेरेपी लेटर?

फ्रेंडशिप थेरेपी लेटर एक भावनात्मक पत्र होता है जो आप अपने करीबी दोस्त को लिखते हैं. इसमें आप उसकी अच्छाइयों की तारीफ करते हैं, पुराने पलों को याद करते हैं और अगर कभी कुछ गलतफहमियां हुई हों, तो उन्हें भी सुलझाने की कोशिश करते हैं. ये एक तरह का थैरेप्यूटिक प्रोसेस होता है जिसमें लेखक भी भावनात्मक तौर पर हल्का महसूस करता है और पढ़ने वाला भी जुड़ाव महसूस करता है.

इन 3 हिस्सों में बंटा होता है फ्रेंडशिप थेरेपी लेटर

  1. सराहना : इसमें दोस्त की उन बातों का जिक्र किया जाता है जो उसे खास बनाती हैं. जैसे- “जब मैं टूट चुका था, तब सिर्फ तू ही था जो बिना कुछ कहे पास बैठा रहा.”
  2. मेमोरी रिकॉल : यहां आप उन पलों को साझा करते हैं जो आज भी आपके रिश्ते की नींव हैं.
  3. ईमानदारी से हीलिंग : अगर किसी वजह से रिश्ता कमजोर हुआ है, तो उसे स्वीकार करते हुए बिना आरोप-प्रत्यारोप के समाधान तलाशने की कोशिश होती है.

क्यों हो रहा है ट्रेंड?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम बहुत सारी भावनाओं को अपने दिल में रखते हैं लेकिन उन्हें कह नहीं पाते. सोशल मीडिया के इस दौर में दिल की बात कहने की जगह सिर्फ इमोजी और गिफ ने ले ली है. ऐसे में एक लिखा हुआ पत्र दोस्ती में फिर से गर्माहट ला सकता है. कई मनोवैज्ञानिक भी इसे एक सेल्फ हीलिंग प्रैक्टिस मानते हैं.

डिजिटल दौर में भी बना सकता है गहरा असर

अब डिजिटल का जमाना आ गया है. इसलिए लोग अपनी भावनाओं को मोबाइल के टेक्सट के जरिये साझा करते हैं. आप इसे लेटर को और आकर्षक बनाना चाहते हैं तो उसे गूगल डॉक्स या कैनवा की मदद से डिजिटल कार्ड बनाकर भेज सकते हैं. इसमें सबसे जरूरी चीज होती है आपके शब्द. माध्यम कोई भी हो यह मायने नहीं रखता.

फ्रेंडशिप थेरेपी भी मेंटल हेल्थ में मददगार

टाइम.कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार कोविड के बाद बहुत से लोग अकेला महसूस करने लगे थे. लेकिन यह फ्रेंडशिप थेरेपी लेने के बाद लोगों के अकेलापन की भावना कम हो गयी और पुरानी दोस्ती फिर से मजबूत हो गयी. जिससे तनान या चिंता कम हो गयी. इस प्रक्रिया की मदद से नारजगी और गलतफहमी दूर होती जा रही है. क्योंकि थेरेपी के दौरान बिना डर और शर्म के अपनी बात कह पाते हैं, जिससे मन का बोझ हल्का होता है. थेरेपिस्ट हमें यह भी समझाने में भी मदद करता है कि आपने कहां गलती की है, और आपके व्यवहार और सोच का पैटर्न क्या है. इससे आप अपने इंमोशन को जल्दी समझते हैं. यह थेरेपी हेल्दी कम्यूनिकेशन में भी मददगार है. दरअसल यह थेरेपी कपल्स थेरेपी की तरह ही काम करते हैं, जिसमें वो दो दोस्तों के बीतचीत और व्यवहार के पैटर्न्स को समझते हैं.

1980 से 2000 के बीच जन्मे लोग हो रहे आकर्षित

टाइम.कॉम की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1980 से 2000 के बीच जन्मे लोग इस थेरेपी की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. बार्बी एटकिंसन, जो अमेरिका के ह्यूस्टन में Friendship Therapy देती हैं वे कहती हैं कि अब करीब 25 फीसदी क्लाइंट्स दोस्ती में आए मुद्दों को लेकर एक साथ काउंसलिंग लेते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 61 फीसदी अमेरिकी वयस्कों ने कहा था ”करीबी दोस्ती उन्हें संतोषजनक जीवन देने के लिए जरूरी है”.

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